उन्होंने अखबारों में खुफिया जानकारी लीक किए जाने की जांच कराने की मांग की है। जम्मू-कश्मीर सरकार को गिराने की कथित साजिश रचने के आरोपों से घिरे पूर्व सेना प्रमुख ने मंगलवार को गुड़गांव में पत्रकारों से बातचीत में सफाई पेश की।
उन्हाेंने पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल रामदास द्वारा19 जून 2012 को प्रधानमंत्री को लिखे पत्र संवाददाताओं को उपलब्ध कराते हुए कहा कि इसके आधार पर कार्रवाई की गई होती तो खुफिया जानकारियां लीक नहीं होतीं। उन्हाेंने जम्मू कश्मीर के कुछ मंत्रियों को सरकार गिराने के लिए पैसे दिए जाने के आरोपों का खंडन किया।
उन्होंने कहा कि उन्हें यह रकम ‘सद्भावना की छतरी’ कार्यक्रम के तहत दी गई थी ताकि राज्य में शांति बनी रहे। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई भी खुफिया यूनिट ने की थी। उन्होंने कहा कि सेना प्रमुख होने के नाते उनका काम मात्र एक सौ लोगों की एक यूनिट संभालना नहीं था। यह खुफिया यूनिट डीजीएमआई के नीचे काम करती थी।
उन्होंने कहा कि खुफिया यूनिट को काम करने दिया जाता तो जम्मू कश्मीर में हालात बदतर नहीं होते। उनसे जब पूछा गया कि गृह मंत्री सुशील शिंदे ने राजनीतिज्ञों के नाम पूछे हैं, तो उन्होंने देश हित का हवाला देेते हुए उनके नाम बताने से मना कर दिया।