साइबर सिटी के 40 फीसदी बच्चे दंत रोग की जकड़ में हैं। उच्च वर्ग ही नहीं, बल्कि मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चे भी दांत संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
यह खुलासा जिला स्वास्थ्य विभाग के हेल्थ स्कूल एजुकेशन के तहत सालभर स्कूलों और कालेजों में आयोजित शिविरों से हुआ है। इस साल अब तक साढ़े पांच हजार से ज्यादा बच्चों की जांच हो चुकी हैं।
सिविल अस्पताल के दंत चिकित्सक डॉ. पवन बताते हैं कि 40 फीसदी बच्चों में दंत रोग मिला है। शहरी क्षेत्र में जंक फूड की आदत इसका मुख्य कारण है, जबकि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे साफ-सफाई न रखने की वजह से दांतों की बीमारियों से जूझ रहे हैं।
ग्रामीण ही नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्र में भी लोग दांतों की साफ-सफाई को लेकर गंभीर नहीं हैं। रात में सोते समय दांतों की सफाई न करना इनके खराब होने का कारण बनता है। एक दांत खराब हो जाए और उपचार न किया जाए तो यह अन्य दांतों को भी खराब कर देता है।
क्या बरतें सावधानी
- रात में खाना खाने के बाद अच्छी तरह से ब्रश करें
- चॉकलेट, टॉफी और जंक फूड के सेवन से बचें
- दांतों में ठंडा और गर्म लगने पर अनदेखा न करें
- छह माह में दंत चिकित्सक से परामर्श लें
इनका भी रखें ख्याल
- तीन माह के बाद ब्रश बदल देना चाहिए।
- गले की बीमारी हो तो ठीक होने के बाद भी ब्रश बदल दें
- मुंह से दुर्गंध या मसूड़ों से खून आने को अनदेखा न करें।