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हरियाणा का ये टीचर बन गया 'गूगल गुरु'

Mon, 10 Jun 2013 01:20 PM IST
सुरेंद्र असीजा/हरियाणा ब्यूरो
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हरियाणा के फतेहाबाद के एक शिक्षक दुनियाभर के उन चुनिंदा 750 अध्यापकों में शुमार किए गए हैं जिन्हें गूगल ने बच्चों को शिक्षा देने के एक खास प्रोजेक्ट के लिए चुना है।
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नरेंद्र गिल्होत्रा ऐसे शख्स हैं, जो दुनिया भर में बच्चों को तकनीक के सहारे शिक्षा दे रही गूगल के साथ जुड़े हैं। पूरे देश में वे गूगल सर्टिफाइड टीचर कम्युनिटी से जुड़े एकमात्र अध्यापक हैं।

गूगल सर्टिफाइड टीचर कम्युनिटी गूगल की ओर से चलाई गई एक मुहिम है। इसमें पूरे विश्व से 750 अध्यापक जुड़े हुए हैं, जो ऑनलाइन बच्चों की शिक्षा संबंधी दुविधाओं को दूर करते हैं।
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गुगल से जुड़ने के बाद गिल्होत्रा सिडनी में हाल ही में हुए तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में भाग लेकर आए हैं।

ऐसे हुआ चयन
गूगल सर्टिफाइड टीचर कम्युनिटी से जुड़ने के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। इसमें अध्यापकों को शिक्षा में नई क्रांति लाने के लिए अपना प्रजेंटेशन देना था।

गिल्होत्रा ने बच्चों को शिक्षा के लिए मोटिवेशन और लर्निंग विषय पर एक वीडियो बनाकर गूगल अकादमी सिडनी को भेजा था। इस आधार पर उनका चयन हो गया और उन्हें तीन दिन के लिए प्रशिक्षण शिविर के लिए सिडनी बुला लिया गया।

नई तकनीक से दी जाएगी शिक्षा
गिल्होत्रा ने बताया कि तीन दिन के इस प्रशिक्षण शिविर में बच्चों के लिए शिक्षा में नए प्रयोगों के बारे में जानकारी दी गई। विशेष तौर पर बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ गूगल एप्स, मैप, डॉक्स, कैलेंडर, यू-ट्यूब, स्क्रिप्ट की जानकारी देने और उन्हें आधुनिक शिक्षा की ओर अग्रसर करने के लिए यह शिविर आयोजित किया गया।

शिविर में इस बात पर विचार किया गया कि शिक्षा में गूगल एप्स का प्रयोग कैसे किया जाए। उन्होंने बताया कि विदेशों में बच्चे किताबों का प्रयोग नहीं करते बल्कि टैब, लैपटॉप व कंप्यूटर से शिक्षा ग्रहण करते हैं।

वे क्लासरूम में टैब आदि का प्रयोग करते हैं और ऑनलाइन इंटरनेट से जुड़कर शिक्षा ग्रहण करते हैं। उनका टेस्ट भी ऑनलाइन होता है और रिजल्ट भी ऑनलाइन ही जारी होता है। अगर भारत में भी इसी तरह बच्चों को शिक्षा दी जाए तो यहां के बच्चे क्रिएटिव होंगे और उनकी प्रतिभा निखरेगी।

ऑनलाइन जुड़ेंगे अध्यापकों से
इसके अलावा बच्चों से अध्यापक यू-ट्यूब पर जुड़े रहेंगे। वे ऑनलाइन ही बच्चों की शिक्षा संबंधी समस्याओं का समाधान करेंगे और उसे दूसरे अध्यापकों से शेयर भी करेंगे। यानी बच्चों को उनकी शिक्षा संबंधी समस्या का हल ऑनलाइन उसी समय मिल जाएगा।
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