ट्रायल सफल होता है तो हैड पर बिजली बनाने के लिए हाइड्रो प्रोजेक्ट का कार्य भी शुरू कर दिया जाएगा। टरबाइन द्वारा अमेरिका के कैलिफोर्निया में सफलतापूर्वक बिजली पैदा कर रही आईटी तकनीक का भारत में पहली बार टोहाना में छह माह पहले प्रयोग की शुरूआत की गई थी।
प्रदेश के सीएम एवं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला ने भी इस प्रोजेक्ट का निरीक्षण कर कार्य में लगी आईसीएल कंपनी की टीम का उत्साह बढ़ाया था।
टरबाइन घूमी और जगमगा उठी थी लाइटें
गौरतलब है कि अमेरिकी तकनीक इनस्ट्रीम ऑर्गर टरबाइन (आईएटी) पर आधारित पनडुब्बीनुमा टरबाइन को यहां प्रयोग के लिए तैयार किया गया था।
लगभग 6.5 टन वजन की टरबाइन को बड़ी हाइड्रो क्रेनों की मदद से नहर में उतारा गया था। नहर में उतारते ही इसकी टरबाइन घूमी और हैड पर लगाई गई लाइटें बिजली से जगमगा उठीं थी।
मौके पर मौजूद टीम सदस्यों, ग्रामीणों और शहरवासियों ने जोरदार तालियां बजाकर टीम के प्रयास की सराहना की थी।
दिन-रात पैदा होगी बिजली
इस तकनीक से एक टरबाइन एक समय में 150 किलोवाट तक बिजली पैदा कर सकती है। इस स्थान पर दर्जनों टरबाइनें लगाकर 24 घंटे लगातार बिजली पैदा की जा सकती है।
यहां से निकलने वाली छह नहरों में साल भर पानी का बहाव रहता है। इसलिए यह तकनीक यहां पूरी तरह से कामयाब है।
एक मेगावाट पर करोड़ों की लागत
ट्रायल करने वाली इंटरनेशनल क्वाइल लिमिटेड (आईसीएल) कंपनी के निदेशक परमजीत सिंह ने बताया कि इस तकनीक के माध्यम से एक मेगावाट बिजली पैदा करने पर लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत आती है।
दिन-रात निर्बाध गति से बिजली उत्पादन होने के कारण यह लागत बहुत कम समय में रिकवर हो जाती है। उन्होंने बताया कि यहां से पैदा होने वाली बिजली को नजदीकी बिजलीघर के ग्रिड में भेजा जाएगा। जिससे पूरे जिले को भी रोशन किया जा सकता है।
विधायक बराला का वर्षों पुराना सपना होगा सच
यह परियोजना स्थानीय विधायक एवं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला का वर्षों पुराना सपना है। उन्होंने वर्षों पहले भाखड़ा हैड के पानी से बिजली बनाने के बारे में सोचा था।
अब प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद उन्होंने इस योजना पर काम किया और सिंचाई विभाग के तत्कालीन एक्सईएन ओपी बिश्रोई से यहां नहरी पानी की वेलोसिटी व अन्य आवश्यक तथ्यों का विवरण तैयार करवाया।
उन्होंने इस विवरण को अमेरिकी कंपनी को भिजवाया। अमेरिकी कंपनी की भारत में स्थित सहयोगी कंपनी आईसीएल के 3 सदस्यीय विशेषज्ञ दल ने दो माह पहले यहां परिस्थितियों के आकलन व सर्वे का काम किया था।
सर्वे के बाद एक सप्ताह पहले आईसीएल कंपनी ने लाव-लश्कर के साथ यहां डेरा डाल दिया और ट्रायल कार्य को बुधवार को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
मुख्यमंत्री भी कर चुके हैं अवलोकन
गौरतलब है कि पहली बार 31 मई को टोहाना दौरे पर आए प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने इस प्रोजेक्ट का अवलोकन किया था।
उन्होंने कहा था कि भारत में पहली बार यह नए तरीके का प्रोजेक्ट बिजली जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। उन्होंने बताया था कि यह प्रोजेक्ट न केवल प्रदूषण मुक्त बिजली उत्पादन करता है बल्कि एक बार लगाने के बाद बिना किसी ईंधन के लगातार बिजली पैदा करता है।