फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Fatehabad News: सिंचाई विभाग की अनुमति और ड्रेन के इंतजार में अटका सेम निवारण प्रोजेक्ट

Fri, 24 Jul 2026 10:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
विज्ञापन
गांव चिंदड़ की सेमग्रस्त भूमि। फाइल फोटो
विज्ञापन
फतेहाबाद। जिले में सेम प्रभावित 10500 एकड़ कृषि भूमि को सुधारने की योजना अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। सिंचाई विभाग से अनुमति नहीं मिलने और पानी निकासी के लिए ड्रेन या पाइपलाइन की व्यवस्था नहीं होने से सेम निवारण प्रोजेक्ट अधर में लटका हुआ है।
विज्ञापन

कृषि लवणता एवं मृदा विभाग ने करीब दो वर्ष पहले जिले के 8 गांवों की सेम प्रभावित भूमि सुधारने के लिए योजना तैयार की थी। इसके तहत सोलर पंप लगाकर जमीन के अंदर जमा पानी को बाहर निकालने का प्रस्ताव बनाया गया था। निकाले गए पानी को ड्रेन या आरसीसी पाइपलाइन के माध्यम से नहर में पहुंचाने की योजना थी।
विभाग ने सेम प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर जलस्तर के आधार पर सोलर पंप लगाने का खाका तैयार किया था। योजना के अनुसार प्रत्येक 10 एकड़ क्षेत्र पर सोलर पंप लगाए जाने थे लेकिन अनुमति और तकनीकी व्यवस्थाएं पूरी नहीं होने से काम शुरू नहीं हो सका। प्रोजेक्ट में देरी के कारण किसानों को राहत नहीं मिल रही है। सेम की समस्या से कृषि भूमि की उत्पादकता प्रभावित हो रही है और प्रभावित क्षेत्र का दायरा लगातार बढ़ रहा है। विभाग अब जरूरी अनुमति और व्यवस्थाएं पूरी होने का इंतजार कर रहा है।
विज्ञापन


8 नए गांवों की 10,500 एकड़ जमीन पर मंडराया संकट
परियोजना में देरी का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। मृदा एवं लवणता विभाग ने इससे पहले जिले के 30 गांवों में सोलर पंप लगाकर जलनिकासी शुरू की थी जिससे उन गांवों की सेम से खराब हो चुकी जमीन को उपजाऊ बनाने में मदद मिली है। वहीं अब जिले के 8 और गांव जिसमें मेहूवाला, खाराखेड़ी, काजलहेड़ी, गोरखपुर, भोड़ा होशनाक, बनावाली, किरढ़ान और ढांड की 10,500 एकड़ उपजाऊ भूमि सेम की चपेट में आ चुकी है। बारिश के दौरान इस भूमि में फसल की बिजाई करना नामुमकिन होता जा रहा है।

सेमग्रस्त गांवों की भूमि
गांव- सेमग्रस्त भूमि -पंप
मेहूवाला - 500 - 6
खाराखेड़ी - 3500 - 20
काजलहेड़ी - 2000 - 15
गोरखपुर - 1500 - 15
भोड़ा होशनाक - 300 - 03
बनावली - 1450 - 10
किरढ़ान - 700 - 07
ढांड - 800 -07
(भूमि एकड़ में)
:: सेमग्रस्त भूमि के लिए सोलर पंप भूमि की जांच की गई है। सिंचाई विभाग अगर जलनिकासी का प्रबंध करता है तो मृदा लवणता विभाग की ओर से एस्टीमेट बनाकर का काम शुरू कर दिया जाएगा।
- राजेश कुमार, कृषि मृदा लवणता एवं विभाग, फतेहाबाद।
-
:: जमीन के पानी को नहर में डालने की अनुमति देने से पहले पानी का टीडीएस जांच की जाती है इसके बाद आगे की प्रक्रिया होती है। वहीं ड्रेन में सेमग्रस्त भूमि का पानी डाल सकते हैं। फिलहाल जमीन के पानी को नहर में डालने के प्रोजेक्ट की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
विज्ञापन

- प्रवीण कुमार, एसडीओ, तकनीकी शाखा, सिंचाई विभाग, फतेहाबाद।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें