संत सुखदेवानंद जी महाराज प्रवचन करते हुए स्त्रोत आयोजक
फतेहाबाद। इंसान अपनी इच्छा और सुविधा के अनुसार जीवन की दिशा तय करना चाहता है लेकिन होता वही है जो परमात्मा ने तय किया है। इसलिए मनुष्य को पहले स्वयं को परमात्मा के प्रति समर्पित करना चाहिए। यह संदेश संत सुखदेवानंद महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन दिया।
सेक्टर तीन स्थित कम्युनिटी सेंटर में परमहंस योग दरबार के तत्वावधान में श्रीमद्भागवत कथा चल रही है। कथा में भाजपा जिला प्रधान प्रवीण जौड़ा और श्रीकृष्ण कृपा सेवा समिति के प्रधान दीपक सरदाना मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे और पूजा की। संत सुखदेवानंद महाराज ने कंस वध का प्रसंग सुनाया।
संत ने कहा कि कंस ने भगवान श्रीकृष्ण को मारने का प्रयास किया। उसे पहले ही भविष्यवाणी के बारे में पता था कि उसका वध करने वाला जन्म ले चुका है। इसके बावजूद वह अपने भय से मुक्त नहीं हो सका। महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध कर उसके अत्याचारों का अंत किया।
कंस को श्रीकृष्ण से इतना भय था कि अंत समय उसे हर जगह भगवान श्रीकृष्ण दिखाई देने लगे। यह भगवान की माया थी। अंत वही हुआ जिसकी रचना परमात्मा ने पहले ही कर रखी थी। कंस वध के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने जेल में बंद कैदियों को मुक्त कराया। उन्होंने मथुरा का राज अपने नाना उग्रसेन को सौंप दिया।
कथा में संत ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रसंग भी सुनाया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने किस तरह सुदामा की लाज रखी। बाल कलाकारों ने कृष्ण-सुदामा प्रसंग पर सुंदर झांकी प्रस्तुत की। दिल्ली से पहुंचे संत सर्व योगानंद ने भी संगत को आशीर्वचन दिए। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।