भीमेवाला और चितैन गांव में पिछले साल बारिश से हुए जलभराव के बाद फसल नुकसान और मकानों में दरार आने पर भी मुआवजा न मिलने से ग्रामीणों में गहरा रोष है। लोगों का कहना है कि सरकार ने नुकसान की भरपाई का भरोसा दिया था, मगर अब तक राहत नहीं मिली।
भीमेवाला की आबादी करीब दो हजार और चितैन की एक हजार से अधिक है। भीमेवाला में 1400 एकड़ उपजाऊ जमीन है, लेकिन वर्ष 2021 से जलभराव और सेम की समस्या लगातार बनी हुई है। वर्ष 2025 में हालात और बिगड़े, जब जलभराव के कारण लगभग 200 एकड़ में धान, नरमा और बाजरा पूरी तरह नष्ट हो गया। चितैन में भी करीब डेढ़ सौ एकड़ फसल खराब हुई।
ग्रामीण अमित, सोनू, वेदप्रकाश, महा सिंह और टेका राम ने बताया कि उन्हें अभी तक किसी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं मिली। सामाजिक कार्यकर्ता बलवान सिंह ने बताया कि सेम की समस्या से गांव के 15 से अधिक मकानों में दरारें आ चुकी हैं। कई मकान गिरने की स्थिति में हैं और कुछ परिवारों ने उनमें रहना भी छोड़ दिया है।
जल्द मुआवजा देने की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2021 में नुकसान का मुआवजा मिला था, जबकि 2022 में कुछ लोगों तक ही राहत पहुंची। इसके बाद हालात बिगड़ते गए, लेकिन सहायता नहीं मिली। किसान अमित कुमार और रामफल ने बताया कि 2025 में भारी नुकसान हुआ, फिर भी प्रशासन और प्रदेश सरकार की तरफ से कोई राहत नहीं मिली। ग्रामीणों ने सरकार से मांग रखी है कि फसल नुकसान और मकानों की क्षति का जल्द उचित मुआवजा दिया जाए ताकि प्रभावित परिवारों को राहत मिल सके।
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बारिश के जलभराव से बनी सेम की समस्या के कारण गांव के किसान बर्बाद हो चुके हैं। सेम के कारण 15 से अधिक मकानों में दरारें आने से वे गिरने के कगार पर हैं। कुछ लोगों ने इन मकानों में रहना भी छोड़ दिया है। प्रदेश सरकार को जल्द मुआवजा प्रदान कर उनको देनी चाहिए।
- सुरेश कुमार, सरपंच प्रतिनिधि भीमेवाला।