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Fatehabad News: ग्राम सचिव बोले- प्रशासन अपनी कमियां छुपाकर हम पर कार्रवाई कर रहा, डीसी का जवाब- मुख्य सचिव व सुप्रीम कोर्ट का है दबाव

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लघु सचिवालय में डीसी से मिलने पहुंचे जिलेभर के ग्राम सचिव।
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फतेहाबाद। पराली जलाने के मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा करने से भड़के ग्राम सचिवों और पटवारियों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वीरवार को ग्राम सचिवों और पटवारियों व कानूनगो की यूनियन ने डीसी अजय तोमर से मुलाकात की। मुलाकात में उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई पर रोष जताया। इससे पहले ग्राम सचिवों ने कहा कि प्रशासन अपनी कमियां छुपाकर उन पर कार्रवाई कर रहा है। प्रशासन को कार्रवाई के बजाय कमियों पर मंथन करना चाहिए। ग्राम सचिवों से बातचीत में डीसी ने जवाब दिया कि मुख्य सचिव और सुप्रीम कोर्ट का दबाव है। पराली जलाने के मामले रोकने के लिए ग्राम सचिव और पटवारी मदद करें।गौरतलब है कि जिले में 90 स्थानों पर पराली जल चुकी है। प्रशासन तीन पटवारियों और तीन दो ग्राम सचिवों पर अनुशासनिक कार्रवाई व चार्जशीट की अनुशंसा कर चुका है। डीसी से मिलने से पहले ग्राम सचिवों ने लघु सचिवालय के पार्क में बैठक की। बैठक में जिले के 40 ग्राम सचिव मौजूद रहे। ग्राम सचिव वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष नरेंद्र कुंडू ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कृषि विभाग ने जिले में 400 बेलरों की सूची जारी की है। मगर गांवों में बेलर ही नहीं है। बेलर कहां गए, इसकी जांच होनी चाहिए। सरकार से करोड़ों रुपये लेकर सीएससी सेंटर बना दिए गए। अब वो कहां गए।
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कृषि विभाग समय रहते किसानों को बेलर व अन्य मशीनरी उपलब्ध करवाता तो यह परिस्थिति नहीं होती। किसान पराली जला रहे हैं, तो इस विषय पर प्रशासन को मंथन करना चाहिए। जिला, उपमंडल व तहसील प्रशासन ग्राम सचिवों को टारगेट कर रहा है। चार्जशीट करने की धमकी दे रहे हैं, स्पष्टीकरण मांगे जा रहे हैं। ग्राम सचिवों के प्रति प्रशासन का रवैया ठीक नहीं है। पहले से ग्राम सचिव काम के बोझ में दबा है। अगर फिर भी प्रशासन दबाव बनाएगा तो काम करना मुश्किल हो जाएगा।

एक महीने तक बाकी काम छोड़कर पराली जलाने की रोकथाम ही करेंगे
ग्राम सचिवों ने कहा कि एक ग्राम सचिव के पास चार से पांच पंचायतों का कार्यभार है। उनके पास पंचायतों के कार्यों के साथ-साथ लाल डोरा, सीएम विंडो, सर्वे सहित कई काम हैं। एसोसिएशन ने फैसला लिया है कि अब एक महीने तक ग्राम सचिव न किसी कार्यालय में जाएंगे और न ही किसी कार्यक्रम में भाग लेंगे। सिर्फ पराली प्रबंधन का ही काम करेंगे। अगर फिर भी प्रशासन की कार्रवाई हुई तो फिर ग्राम सचिव पराली प्रबंधन का काम भी बंद कर देंगे।
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उधर, फील्ड में उतरे सभी एसडीएम
वहीं, पराली जलाने से किसानों को रोकने के लिए डीसी के आदेशों के बाद एसडीएम फील्ड में उतर गए हैं। फतेहाबाद के एसडीएम राजेश कुमार ने गांव हिजरावां खुर्द, बहबलपुर, बीघड़, सालमखेड़ा में सरपंचों, नंबरदारों, बेलर मालिकों व किसानों के साथ बैठकें की तथा उन्हें पराली प्रबंधन के लिए प्रेरित किया। वहीं, टोहाना के एसडीएम प्रतीक हुड्डा ने गांव कमालवाला, कन्हड़ी, समैन, ललौदा, रत्ताखेड़ा व अमानी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने मौके पर ही पराली की आग को अग्निशमन विभाग की गाड़ी मंगवा कर बुझवाया।

57 किसानों पर लगा 145000 जुर्माना
अब तक जिले में 90 स्थानों पर पराली जलाने के मामले आ चुके हैं। कृषि विभाग की टीमों द्वारा 57 किसानों पर 145000 रुपये जुर्माना लगाया गया है।

कोट
ग्राम सचिवों ने प्रशासन की कार्रवाई के विरोध में डीसी से मुलाकात की है। डीसी ने कहा कि मुख्य सचिव और सुप्रीम कोर्ट का दबाव है। इसलिए पराली जलाने के मामले को रोकने के लिए प्रशासन की मदद करें। हम मदद के लिए तैयार हैं, लेकिन अनावश्यक दबाव नहीं झेलेंगे।
-नरेंद्र कुंडू, प्रदेश उपाध्यक्ष, ग्राम सचिव वेलफेयर एसोसिएशन
कोट
ग्राम सचिव मिलने आए थे। उन्होंने अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा है, उनका ज्ञापन ले लिया है। कोई आश्वासन नहीं दिया गया है। पराली जलाने की घटनाएं रोकने के लिए प्रशासन हरसंभव प्रयास कर रहा है।
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-अजय सिंह तोमर, डीसी, फतेहाबाद
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