फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल की आईसीयू में कोने में रखे वेंटिलेटर
फतेहाबाद। व्यवस्थाओं की कमी से गंभीर मरीज रेफर हो रहे हैं और वेंटिलेटर नागरिक अस्पताल की आईसीयू के कोने में पड़े-पड़े दम तोड़ रहे हैं। सच्चाई ये है कि इन्हें चलाने के लिए नागरिक अस्पताल में डॉक्टर ही नहीं हैं। वेंटिलेटर का चलाने के लिए रोजाना चार डॉक्टरों की जरूरत होती है।
बता दें कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान सबसे ज्यादा वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी थी और सरकारी अस्पतालों में इस दौरान कमी भी महसूस की गई। इस दौरान जिले को पीएम केयर फंड से 33 वेंटिलेटर मिले थे। ये वेंटिलेटर कई मरीजों की जान बचाने में रक्षक भी साबित हुए। लेकिन महामारी के बाद ये वेंटिलेटर आईसीयू के कोने में शो पीस बनकर रह गए हैं। डॉक्टरों की कमी के चलते अस्पताल प्रशासन भी गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर पर नहीं ले रहा है। इस कारण मरीजों को अग्रोहा मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि आईसीयू में हर समय डॉक्टर और प्रशिक्षित स्टाफ की जरूरत है जो कि नहीं हैं।
रतिया और टोहाना भी भेजे गए वेंटिलेटर
पीएम केयर फंड से मिले वेंटिलेटर में से पांच टोहाना के नागरिक अस्पताल और 6 को रतिया नागरिक अस्पताल में भेजा गया। लेकिन यहां भी इस्तेमाल नहीं हो रहा है। वेंटिलेटर करीब दो साल से बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं हुए हैं। ऐसे में इनके खराब होने की भी स्थिति बनी हुई है।
कोट
नागरिक अस्पताल की आईसीयू में वेंटिलेटर रखे गए है। डॉक्टर और अन्य स्टाफ की जरूरत है। लेकिन डॉक्टर की पहले कमी है। इमरजेंसी चलाने के लिए भी फील्ड के डॉक्टरों की डयूटी लगानी पड़ रही है।
- डॉ. सुभाष, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, नागरिक अस्पताल