फतेहाबाद। नगर परिषद कार्यालय में मंगलवार को दोपहर तीन बजे पेमेंट अप्रूवल कमेटी का पार्षद सदस्य चुने जाने को लेकर हाउस बैठक बुलाई गई। बैठक शुरू होते ही हंगामा शुरू हो गया और करीब पौने दो घंटे तक पार्षद सदस्य पर सर्वसम्मति नहीं बन पाई, न ही चुनाव करवाया गया। इस दौरान प्रधान-उपप्रधान पक्ष के पार्षद आपस में उलझ गए। अब फिर 6 फरवरी को चुनाव होगा।
उप्रपधान सविता टुटेजा खेमा चुनाव करवाने पर अड़ गया लेकिन प्रधान राजेंद्र सिंह खिंची सर्वसम्मति से चुने जाने पर अड़े रहे। पेमेंट अप्रूवल कमेटी का सदस्य बनने के लिए पार्षद रमेश गिल्होत्रा और अर्जुन कटारिया ने दावेदारी ठोकी। प्रधान ने पांच पार्षदों के साथ गुप्त मीटिंग करके हाउस बैठक में 6-6 माह के लिए चार पार्षद रमेश गिल्होत्रा, अर्जुन कटारिया, किरण बाला और राधा कुलड़िया के नाम का प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव को उपप्रधान खेमे के पार्षदों ने स्वीकार करने से मना कर दिया और हंगामा शुरू कर दिया और कहा कि चुनाव करवाया जाए। हंगामा बढ़ता देख प्रधान ने 6 फरवरी को चुनाव करवाए जाने की घोषणा करके बैठक रद्द कर दी। बैठक में कार्यकारी अभियंता अमित कौशिक, कार्यकारी अधिकारी राजेंद्र सोनी, लेखाकार अधिकारी सुरेंद्र रोहिल्ला, लेखाकार नवीन भाटिया भी मौजूद रहे।
प्रधान ने अपने पक्ष के पार्षदों साथ की गुप्त मीटिंग तो बिगड़ा मामला
नगर परिषद की हाउस बैठक में जब नाम पर सहमति नहीं बनी तो प्रधान राजेंद्र सिंह खिंची अपने पक्ष के पार्षद मोहन लाल नारंग, किरण बाला, अनिल गर्ग, सुरेंद्र डिंगवाल, प्रतिनिधि योगी हंसराज को साथ लेकर कार्यकारी अभियंता के कक्ष में पहुंचे। यहां पर उन्होंने गुप्त मीटिंग की। मीटिंग के बाद पहले 6 माह रमेश गिल्होत्रा और फिर अर्जुन कटारिया, किरण बाला और राधा कुलड़िया का नाम रखा। लेकिन उपप्रधान पक्ष भड़क गया। पार्षद निलांशी शर्मा ने कहा कि प्रधान को उपप्रधान को साथ ले जाकर बैठक करनी चाहिए थी और जो नाम रखे है वह खुद के पक्ष के हैं। चुनाव करवाया जाना चाहिए।
10 बार खड़े होकर बोले पार्षद रमेश, मैंने घूमकर मेहनत की
बैठक शुरू होते ही पार्षद रमेश गिल्होत्रा ने कहा कि उन्हें सर्व सम्मति से सदस्य चुना जाए। पिछले चार माह से पार्षदों के पास जा-जाकर मेहनत कर रहा हूं। पार्षद अर्जुन कटारिया ने कहा कि पहले 6 माह मैं बन जाता हूं इसके बाद आप बन जाना। बैठक में पार्षद रमेश गिल्होत्रा के भाई ने भी दबाव डालने का प्रयास किया। पार्षद गिल्होत्रा ने यहां तक कहा कि 6 माह के बाद या पहले सही काम न करूं तो हटा देना। अगर सही काम करूं तो आगे भी उसे ही बनाया जाए। पार्षद रमेश गिल्होत्रा को पेमेंट अप्रूवल कमेटी का सदस्य चुने जाने को लेकर पहले से ही कयास लगाए जा रहे थे। गिल्होत्रा इस तैयारी के साथ भी पहुंचे थे कि उनके नाम पर सर्वसम्मति बन जाएगी। अगर नहीं भी बनती है तो चुनाव में भी उनके पक्ष में वोटिंग होगी। बताया जा रहा है कि गिल्होत्रा बैठक में भी उपप्रधान पक्ष के पार्षदों के साथ पहुंचे थे। लेकिन पार्षद अर्जुन कटारिया द्वारा दावेदारी ठोकने से गेम पलट गई।
पार्षद नारंग बोले- सदस्य बनने के लिए यूं लड़ रहे जैसे गाजर का हलवा मिलेगा :
बैठक में हंगामे के दौरान पार्षद मोहन लाल नारंग ने कटाक्ष करते हुए कहा कि कमेटी बननी चाहिए और सर्वसम्मति से चुन लिया जाना चाहिए। बैठक में यूं हंगामा किया जा रहा है जैसे इसमें गाजर का हलवा मिलेगा।
उपप्रधान ने बैठक में साधी चुप्पी
पेमेंट अप्रूवल कमेटी को लेकर हुई बैठक में उपप्रधान सविता टुटेजा ने चुप्पी साधे रखी। हंगामे के दौरान उनके पक्ष के पार्षद बोलते रहे लेकिन वह खुद नहीं बोली और बैठक रद्द के बाद ये कहा कि सर्वसम्मति नहीं बन रही है तो चुनाव करवाया जाए। भाईचारा न बिगाड़ा जाए। सदस्य 6 माह के लिए नहीं बल्कि पूरी अवधि के लिए ही बनाया जाए।
पांच में से चार सदस्य भी कर सकते है बिल पास :
पेमेंट अप्रूवल कमेटी में प्रधान, उपप्रधान, सीईओ, संबंधित वार्ड का पार्षद और हाउस से चुना गया पार्षद सदस्य होगा। पेमेंट अप्रूवल कमेटी की 10 दिन में एक बार बैठक जरूरी है। ये ही नहीं अगर बैठक में पांच में से चार सदस्य पहुंचते है तो भी बिल पास हो जाएगा। ये ही नहीं पेमेंट अप्रूवल कमेटी के लिए हाउस द्वारा चुने गए पार्षद सदस्य को बहुमत से हाउस हटा भी सकता है।
कोट
पेमेंट अप्रूवल कमेटी के सदस्य के लिए बैठक बुलाई गई थी। लेकिन सहमति नहीं बनी है। 6 फरवरी को चुनाव करवाया जाएगा।
-राजेंद्र सिंह खिंची, प्रधान नगर परिषद