फतेहाबाद। फतेहाबाद के गांव नूरकी अहली में ऑनर किलिंग प्रकरण में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनील जिंदल की अदालत ने दो दोषियों मक्खन और बलवीर को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वहीं, सुबूत न जुटाने के आरोप में फतेहाबाद के तत्कालीन तीन इंस्पेक्टरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए हैं। अदालत ने फतेहाबाद की एसपी को तीनों इंस्पेक्टर के खिलाफ कार्रवाई कर तीन माह के भीतर रिपोर्ट अदालत में पेश करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने एसपी को दिए आदेश में कहा है कि इन लापरवाह इंस्पेक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करके रिपोर्ट कोर्ट सबमिट करें, ताकि वह इस फैसले का हिस्सा बन सकें।
यह था मामला
हिसार निवासी निशांत मेहता ने गांव नूरकी अहली निवासी अनीता से वर्ष 2019 में कोर्ट मैरिज की थी। अनीता के परिजन इस शादी के खिलाफ थे। शादी के आठ माह बाद जब अनीता मायके गई, तो लौटी नहीं। निशांत के भाई प्रिंस ने सदर पुलिस को दिए बयान में बताया था कि जब भी निशांत अपनी पत्नी को फोन करता था तो अनीता का पिता मक्खन लाल व भाई जोनी उसे जान से मारने की धमकी देते थे। उसकी पत्नी से बात भी नहीं करवाते थे। वह कहते थे कि अनीता उनके पास नहीं आना चाहती है। निशांत ने इस मामले में हिसार के थाने में शिकायत भी दी थी। प्रिंस ने बताया कि 24 अक्तूबर 2020 को फतेहाबाद में उनकी मौसी की लड़की की शादी थी। निशांत 24 अक्तूबर को शाम पांच बजे अपने भाई को यह कहकर कार में सवार होकर नूरकी अहली चला गया था कि वह अपनी पत्नी अनीता को शादी में ले आएगा। मगर, निशांत शादी में नहीं पहुंचा। रात को सदर थाना से फोन आया कि निशांत की मौत हो गई है।
प्रिंस ने बताया था कि पोस्टमार्टम में अनीता का शव देखा तो उसके शरीर, सिर, मुंह पर चोटों के कई निशान थे। फतेहाबाद सदर पुलिस ने प्रिंस की शिकायत पर निशांत के ससुर मक्खन सिंह, चाचा ससुर बलवीर सिंह, पत्नी अनीता, साले जोनी, सास निशु, ताऊ व मामा के बेटे के खिलाफ साजिश रचकर दामाद की हत्या करने की आरोप में धारा 148, 149, 302, 506 के तहत केस दर्ज किया था।
ट्रायल में पुलिस साबित नहीं कर पाई हमलावर घटनास्थल पर थे या नहीं
अदालत में ट्रायल के दौरान पुलिस साबित नहीं कर पाई कि हमलावर घटनास्थल पर थे या नहीं। अदालत ने इस मामले में केवल निशांत के ससुर मक्खन व चाचा ससुर बलवीर की परिस्थितियों को साक्ष्य मानकर दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोनों दोषियों पर एक-एक लाख जुर्माना भी लगाया। वहीं, उनसे डेढ़-डेढ़ लाख रुपये वसूलकर शिकायतकर्ता को हर्जाने के तौर पर देने को कहा है। यदि दोषी जुर्माना नहीं भरते तो एक साल की कारावास की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
अदालत ने कहा, पुलिस ने आरोपियों की कॉल डिटेल तक नहीं निकलवाई
अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इस ट्रायल में जांच एजेंसी फतेहाबाद पुलिस पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। पुलिस ने बिना तथ्यों की जांच, बिना सुबूत जुटाए संदेह का लाभ देकर अधिकतर अभियुक्तों, आरोपियों को सूची से बाहर निकाल दिया। इस हत्या में कोई चश्मदीद गवाह नहीं था। ऐसे में पुलिस का फर्ज था कि वह आरोपियों की कॉल डिटेल निकलवाती। मोबाइल टॉवर से आरोपियों की लोकेशन की जांच करती कि वह उस वक्त घटनास्थल पर थे या नहीं। जांच अधिकारी ने घटनास्थल पर मौजूद सभी चीजों को एफएसएल में भेजना भी जरूरी नहीं समझा। अदालत ने कहा कि इंस्पेक्टर रमेश चंद्र, जगजीत सिंह व सुखदेव सिंह की यह स्पष्ट लापरवाही है। यह लापरवाही या तो अक्षम अधिकारी की वजह से हो सकती है या पर्याप्त ट्रेनिंग न दिए जाने से।
सुप्रीम कोर्ट के मामले का दिया हवाला
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के स्टेट ऑफ गुजरात बनाम किशन भाई मामले का हवाला देकर पुलिस अधीक्षक फतेहाबाद को आदेश दिए हैं कि वह तीन माह में तीनों पुलिस इंस्पेक्टर के खिलाफ कार्रवाई कर एक्शन टेकन रिपोर्ट अदालत में सबमिट करें। अदालत ने अहलमद को भी सुनिश्चित करने को कहा है कि वह एक्शन टेकन रिपोर्ट लेकर फैसले के साथ अटैच करें।