फतेहाबाद। खेड़ी मेजर नहर के बार-बार टूटने और जर्जर हालत के कारण किसानों और ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सिंचाई विभाग ने नहर के कायाकल्प के लिए करीब 19 करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार किया है।
करीब 40 वर्ष पुरानी इस नहर का 21 किलोमीटर हिस्से में आरसीसी निर्माण प्रस्तावित है। हालांकि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले नहर के आसपास खड़े हरे पेड़ों की कटाई के लिए वन विभाग की एनओसी नहीं मिलने के कारण परियोजना अटक गई है।
खेड़ी नहर से फतेहाबाद, हिसार और सिरसा जिलों के करीब 40 गांवों में पेयजल की आपूर्ति होती है। इसके अलावा 24 गांवों के किसान सिंचाई के लिए भी इसी नहर पर निर्भर हैं। नहर की पटरी जर्जर होने के कारण आए दिन दरारें आने और नहर टूटने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। इससे खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान होता है। वहीं, नहर टूटने की स्थिति में पेयजल और सिंचाई व्यवस्था भी प्रभावित हो जाती है। संवाद
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एक सप्ताह पहले सुलीखेड़ा के पास टूटी थी नहर
10 अगस्त को गांव सुलीखेड़ा के पास खेड़ी नहर की पटरी टूट गई थी। इससे करीब 100 एकड़ कृषि भूमि में पानी भर गया और फसलें खराब हो गईं। ग्रामीणों के अनुसार, इससे पहले करीब दो वर्ष पूर्व भी नहर टूट गई थी। उस समय करीब 40 गांवों की पेयजल आपूर्ति और 24 गांवों की सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हुई थी। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं से किसानों में रोष है। किसान नहर की समस्या का स्थायी समाधान करने और जल्द से जल्द आरसीसी निर्माण शुरू कराने की मांग कर रहे हैं।
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40 हरे पेड़ों की कटाई प्रस्तावित
सिंचाई विभाग की प्रस्तावित योजना के अनुसार 21 किलोमीटर लंबी नहर का आरसीसी निर्माण किया जाना है। निर्माण के दौरान नहर की पटरी के आसपास खड़े करीब 40 हरे पेड़ों को काटना प्रस्तावित है। इसी वजह से वन विभाग की एनओसी लेना जरूरी है। एनओसी नहीं मिलने के कारण 19 करोड़ रुपये की परियोजना का काम शुरू नहीं हो पा रहा है।
:: खेड़ी नहर के निर्माण का एस्टीमेट तैयार किया गया है। नहर की पटरी के साथ लगे पेड़ों की कटाई के लिए एनओसी आवश्यक है। वन विभाग से मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
नरेश कुमार भोला, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग, फतेहाबाद।
:: सिंचाई विभाग की ओर से फरवरी में पेड़ों की कटाई के लिए पत्र भेजा गया था। वन विभाग ने नए वित्त वर्ष की शुरुआत में मुख्यालय को पेड़ों की कटाई के लिए एनओसी का आवेदन भेजा था। हालांकि 17 अप्रैल से हाईकोर्ट की ओर से हरे पेड़ों की कटाई पर रोक होने के कारण फिलहाल एनओसी नहीं मिल पाई है।
- राजेश कुमार, जिला वन अधिकारी, फतेहाबाद।