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शहर में हर साल कट रहे पेड़, पौधरोपण के लिए सड़कों पर जगह ही नहीं

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नागरिक अस्पताल में सूख चुके दो पेड़। - फोटो : Fatehabad
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जीवन के लिए ऑक्सीजन चाहिए। इसलिए आबादी वाले क्षेत्रों में हरियाली को ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। मगर यहां प्रकृति के विपरीत हो रहा है। शहर में पुराने खड़े पेड़ों को काटा जा रहा है। नए पौधे लगाए नहीं जा रहे। न ही पौधे लगाने के लिए शहर में जगह छोड़ी जा रही है। अब घरों की छतों पर रखे गमलों और पार्कों में लगे पौधों के अलावा कहीं हरियाली नजर नहीं आ रही। पिछले एक दशक में फतेहाबाद शहर में 600 से ज्यादा पेड़ विकास के नाम पर काट दिए गए। मगर इनकी भरपाई के लिए कुछ नहीं हुआ। अब आसमान से झांक कर देखा जाए तो शहर में मकानों के अलावा कुछ नजर नहीं आता। शहर में जितने पेड़ काटे जा रहे हैं, उसकी तुलना में पचास फीसदी भी नए पेड़ तैयार नहीं किए गए। संवाद
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पेड़ कटे शहर से, लगेंगे 18 किमी दूर
वन विभाग ने शहर में हिसार रोड पर 23 हरे पेड़ काटे हैं। कायदे से भरपाई के लिए शहर में ही पौधे लगाए जाने चाहिए थे। मगर वन विभाग इनके बदले शहर से 18 किलोमीटर दूर फतेहाबाद डिस्ट्रीब्यूट्री नहर पर 372 पौधे लगाएगा। जबकि अब शहर में हरियाली की जरूरत है।
शहर में नहीं बची पौधों के लिए जगह
शहर में तमाम गलियां व सड़कें पक्की हो चुकी हैं। सड़कों के दोनों साइडों पर फुटपाथ भी पक्की बन चुकी है। बीच में इंटरलॉकिंग टाइलेें लगी हैं। डिवाइडर पर लोहे की ग्रिल लगा दी गई है। पौधों के लिए कच्ची जमीन यानी मिट्टी चाहिए। मगर शहर में ऐसी जगह कहीं नजर नहीं आती।
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ऐसे खत्म होते गए शहर में पेड़
वर्ष 2011 में मिनी बाइपास बनाने के लिए 300 पेड़ काटे गए थे।
वर्ष 2013 में भट्टू रोड से 8 पेड़ काटे गए थे।
वर्ष 2014 में बीघड़ रोड से 13 पेड़ काटे गए।
अब हिसार रोड पर अब 23 पेड़ काटे गए हैं।
पपीहा पार्क के आगे 6 पेड़ आंधी से टूट चुके हैं।
दस साल में करीब सौ पेड़ दीमक से सूख गए।
करीब सौ पेड़ अवैध तरीके से काटे जा चुके।
कोई विभाग गंभीर नहीं
नगर परिषद : धरातल पर गौर करें तो नगर परिषद को पर्यावरण से कोई लेना देना नहीं है। इसलिए नगर परिषद ने पौधरोपण की दिशा में कभी कोई प्रयास नहीं किया। इसलिए सड़कों पर जगह नहीं छोड़ी गई।
वन विभाग : यह विभाग पेड़ों की संख्या को महत्व देता है। हर साल अपने निर्धारित लक्ष्य को पूरा करना होता है। वन विभाग की शहर में दिलचस्पी नहीं, बल्कि विभाग यह देखता है कि जिले में कितने पौधे लगे।
कोट
वन विभाग को ऐसी जगह की तलाश रहती है, जहां पर पौधे सुरक्षित हों। पौधों को जरूरी नमी मिल जाए ताकि सूखे नहीं। शहर में ऐसी जमीन का अभाव है।
-राजेश माथुर, जिला वन अधिकारी, फतेहाबाद।
शहर में हरियाली बहुत जरूरी है। सड़कों पर पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि उनकी देखरेख करना भी जरूरी है। शहर में जगह का अभाव है तो इस समस्या पर गौर किया। भविष्य में आवश्यक कदम भी उठाए जाएंगे।
-अरविंद बाल्यान, ईओ, नगर परिषद।

अवैध रूप से काटे गए पेड़ों के बचे हुए तने। - फोटो : Fatehabad

शहर में मुख्य मार्ग पर नहीं पौधों के लिए जगह। - फोटो : Fatehabad

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