जाखल में खुली रक्त जांच लेबोरेट्री की रिपोर्ट में फर्जीवाड़ा सामने आया है। कुछ ही समय के अंतराल में एक ही मरीज द्वारा कराए गए ब्लड शूगर जांच रिपोर्ट देखकर एक बार तो मरीज के पैरों तले जमीन ही खिसक गई।
उक्त लेबोरेट्री की रिपोर्ट पर उसे विश्वास न हुआ तो उसने दूसरी अन्य लेबोरेट्री से जांच कराई तब उसे संतोष हुआ।
लेकिन वहीं इस तरह से अलग-अलग चार जगहों पर मरीज ने टेस्ट कराए तो लेबोरेट्री के नाम पर चल रहे खून जांच का फर्जीवाड़ा सामने आया।
मामले की शिकायत मुख्यमंत्री दरबार के साथ-साथ स्वास्थ्य मंत्री, जिला सिविल सर्जन के अलावा जिला प्रशासनिक अधिकारियों से की गई है। जिसमें मरीज ने इस तरह चल रहे गोरखधंधे की गहनता से जांच कर गलत रिपोर्ट देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
जाखल के साथ लगते पंजाब के गांव बलरां निवासी चरनजीत पुत्र रविराम ने बताया कि सुबह उसने जाखल मंडी की कमल लेबोरेट्री पर फास्टिंग ब्लड शूगर की जांच कराई तो उसे जो रिपोर्ट दी गई उसे देखकर वह घबरा गया।
रिपोर्ट में शूगर की मात्रा 380 दर्शाई गई थी। रिपोर्ट पर जब उसे विश्वास नहीं हुआ तो वह तुरंत साथ लगती मिडड लेबोरेट्री पर पहुंचा जहां उसकी रिपोर्ट में शूगर 232 आई।
इस तरह एक समय में दो लेबोरेट्री की रिपोर्ट में भारी अंतर होने पर उसे लेबोरेट्री की जांच रिपोर्ट में भारी गड़बड़ी पाई।
उसने बताया कि सही रिपोर्ट पता करने के लिए उसने लगातार तीसरी नेशनल लेबोरेट्री व फिर चौथी पटियाला क्लीनिकल लेबोरेट्री पर भी तुरंत जांच कराई तो उसमें भी 280 व 174 दर्शाई गई।
हार्ट की बीमारी से ग्रस्त चरनजीत ने सभी की रिपोर्टों में भी भारी अंतर पाकर तुरंत मीडिया को जांच के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े का खुलासा किया।
चरनजीत ने कहा कि इस तरह से कुकरमुत्तों की तरह खुली लेबोरेट्री की स्वास्थ्य विभाग अधिकारी कोई जांच अथवा चेकिंग नहीं कर रहा है। जबकि यह लेबोरेट्री सरेआम लोगों की जिंदगियों से खिलवाड़ कर रही हैं।
चरनजीत ने कहा कि लेबोरेट्री चलाने वाले संचालकों की कोई डिग्रियां अथवा लाइसेंस नहीं हैं।
न ही विभाग इसको लेकर कोई कार्रवाई कर रहा है। चरनजीत ने मामले की मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री के अलावा अन्य उच्चाधिकारियों को शिकायत करते हुए कार्रवाई की मांग की है।
मामले की कराएंगे जांच
इस बारे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डा. सुशील कुमार ने कहा कि इस तरह से एक समय में अलग-अलग रिपोर्ट के अंदर अलग-अलग परिणाम मिलना गलत है। इस मामले की उच्चाधिकारियों से बात कर जल्द ही लेबोरेट्री की जांच कराएंगे। जिस लेबोरेट्री में गड़बड़ी पाई जाती है तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।