ब्राह्मणवाला स्कूल में शिक्षकों की कमी की लेकर स्कूल के बाहर रोष व्यक्त करते हुए ग्रामीण।
रतिया। गांव ब्राह्मणवाला के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में 147 बच्चों पर तीन ही शिक्षक हँैं। इनमें भी एक शिक्षक कागजी कार्रवाई की ड्यूटी में लगे रहते हैं। अब शिक्षक पढ़ाएं या इन्हें संभालें। शिक्षकों की कमी होने पर सरपंच समेत कई अभिभावकों ने शुक्रवार को स्कूल में अपने बच्चे पढ़ने के लिए नहीं भेजे। ग्रामीणों ने विरोध में स्कूल के बाहर खड़े होकर रोष व्यक्त किया।
सरपंच प्रतिनिधि हरजीवन और अन्य ग्रामीणों का कहना है कि जब स्कूल में शिक्षकों की कमी पूरी नहीं होती वे स्कूल में अपने बच्चों को नहीं भेजेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि जब शिक्षक ही नहीं है तो कैसे पढ़ेगा इंडिया और बढ़ेगा इंडिया। स्कूल में 147 बच्चे हैं और उन्हें पढ़ाने के लिए तीन शिक्षक हैं। उनमें से भी एक शिक्षक की ड्यूटी कागजी कार्यों को पूरा करने में लगी रहती है। ऐसे में बच्चों को पढ़ाने के लिए यहां पर मात्र दो ही शिक्षक हैं। शुक्रवार को स्कूल में बच्चों की संख्या लगभग 118 रही थी।
सामने न आकर कुछ अभिभावक बोल रहे हैं कि उनकी स्थिति ऐसी नहीं है कि वो अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजकर उनकी महंगी फीस और अन्य खर्चे उठा सके। उनके लिए तो यह सरकारी स्कूल ही सहारा है। अगर यहां भी शिक्षा नहीं मिली तो वे मजबूरन बच्चों को घर पर ही बैठाना पड़ेगा।
स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों के साथ रोष व्यक्त करते हुए स्कूल मैनेजमेंट कमेटी की प्रधान मनप्रीत कौर ने कहा कि शिक्षक न होने से बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। जब शिक्षक ही नहीं होंगे तो गरीब का बच्चा कैसे आगे बढ़ेगा। प्रदेश सरकार और प्रशासन के साथ शिक्षा विभाग को इस समस्या का तुरंत समाधान करना चाहिए।
ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि सोमवार तक शिक्षकों की कमी दूर नहीं हुई और पढ़ाई शुरू नहीं हुई तो वे कड़े कदम उठाने को मजबूर होंगे। गांव के सरपंच प्रतिनिधि हर जीवन सिंह ने बताया कि स्कूल में अध्यापकों की कमी को लेकर वह कई बार उच्च अधिकारी को मिल चुके हैं। इसके अलावा दो-तीन बार लिखित में शिकायत भी दे चुके हैं। इसके बाद शिक्षक भेज दिए जाते हैं लेकिन कुछ समय बाद शिक्षक अन्य जगहों पर ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। इस कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
हरजीवन के अनुसार इस समस्या से परेशान होकर उन्होंने भी अपनी पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाली बेटी को पिछले 10 दिनों से स्कूल में भेजना बंद कर दिया है। अगर जल्द ही अध्यापक नहीं आए तो वह गांव की पंचायत कर ठोस निर्णय लेंगे।