फतेहाबाद। जिला मुख्यालय से ग्रामीण रूटों पर चलने वाली बसों की कमी के कारण स्कूल व कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को रोजाना इस समस्या का सामना करना पड़ता है। आलम यह है कि भले ही कागजों में रोडवेज हर गांव तक बस सेवा पहुंचाने का दावा करती हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
विशेषकर स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए सुबह-शाम का सफर किसी जोखिम से कम नहीं होता। जिले के कई गांवों में बसों का अंतराल एक से डेढ़ घंटे तक का है, जिसके कारण बसों में यात्रियों की भारी भीड़ रहती है। कई रूटों पर तो यात्रियों को बसों के गेट पर लटक कर या पायदानों पर खड़े होकर सफर करना पड़ता है। इससे हर समय दुर्घटना का डर बना रहता है। यह दृश्य फतेहाबाद से रतिया, टोहाना, भूना और भट्टू की ओर जाने वाले कई ग्रामीण मार्गों पर आम है।
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दोपहर व शाम के समय होती है ज्यादा भीड़
सबसे गंभीर समस्या ग्रामीण रूटों पर दोपहर व शाम के समय होती है। जिला मुख्यालय से रतिया, टोहाना, भूना और भट्टू जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर भी काफी परेशानी हाेती है। वहीं काफी ग्रामीण रूटों पर बच्चों के घर जाने के लिए पर्याप्त बसें न होने के कारण एक ही बस में काफी भीड़ रहती है। गांव खैराती खेड़ा, नागपुर, सरदूलगढ़, गोरखपुर, बनगांव, ढांड, आदमपुर सहित काफी रूटों पर काफी बार छात्रों को लटक कर यात्रा करनी पड़ती है।
रोडवेज के यातायात प्रबंधक सुरेंद्र सिंह ने बताया कि सभी रूटों पर बसों के पर्याप्त फेरे हैं, अभी कुछ दिन पहले ही गांव गोरखपुर रूट पर छात्राें की ओर से बस की मांग की गई थी, जिसके बाद रूट पर बस की संख्या बढ़ाई गई है। अगर किसी भी रूट पर छात्रों को बसों की मांग है, तो वह लिखकर एक पत्र कार्यालय में दें।
फतेहाबाद के पुराने बस स्टैंड में बस का इंतजार करते यात्री। संवाद