गांव ढाणी गोपाल बस स्टैंड के नजदीक खासा पठाना के पुराने थेह से सटी जमीन पर नरमे की फसल में टिड्डियों की हजारों की संख्या में मूवमेंट देखी गई है। टिड्डियों ने आसपास के खेतों में नरमे की फसल को भी चट कर दिया है। टिड्डियों के दल आने की सूचना मिलते ही आसपास के गांवों के सैकड़ों किसान मौके पर पहुंच गए। वहीं इलाका नोडल अधिकारी एवं नायब तहसीलदार मनोहर लाल व समाज शिक्षा एवं पंचायत अधिकारी नरेंद्र सिंह कुंडू सहित कृषि अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने जांच के बाद आसपास के किसानों को टिड्डियों के हमले से बचाव को लेकर सुझाव दिए। कृषि विभाग ने टिड्डियों ने किसानों को कीटनाशक दवाई मुहैया करवा दी है और एक साथ थेह के चारों ओर छिड़काव किया जाएगा। सोमवार से लगातार टिड्डी दल पहुंच रहे हैं जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ रही है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि हालांकि उपरोक्त टिड्डी छोटी है और यह अंडा देने की क्षमता भी नहीं रखती। इसलिए किसान एक साथ चारों ओर से कीटनाशक छिड़काव करेंगे तो इस पर काबू पाया जा सकता है।
इन किसानों की फसल हुई की चट : जानकारी के अनुसार टिड्डी दल ने किसान हनुमान सिंह, लीलाराम, धर्म सिंह, लादूराम, बुद्धाराम के खेत में नरमे की फसल को चट कर दिया गया है लेकिन जब मंगलवार को उन्होंने खेतों में जाकर देखा तो हजारों की संख्या में छोटे साइज की टिड्डी नरमे के पौध को खा कर नष्ट कर रही थी। खासा पठाना के सरपंच प्रतिनिधि राजेश कुमार उर्फ राजा ने मामले की सूचना पंचायत अधिकारियों को दी। जिसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों की अलग-अलग टीमों ने मौके पर पहुंचकर टिड्डी दल का जायजा लिया।
ये बोले अधिकारी : कृषि विभाग गोरखपुर के एडीओ डॉ घनश्याम सिहाग, नहला के एडीओ डॉक्टर शैलेंद्र भ्याण, खंड कृषि अधिकारी भूना रामफल नैन तथा कृषि अधिकारी जांडली उमेद सिंह ने बताया कि आमतौर पर भारत में टिड्डियों का हमला राजस्थान, गुजरात और हरियाणा में होता है। ये रेगिस्तानी टिड्डे होते हैं इसलिए इन्हें ब्रीडिंग के लिए रेतीला इलाका पसंद आता है। इन टिड्डों का ब्रीडिंग पीरियड जून-जुलाई से अक्तूबर-नवंबर तक होता है। एक टिड्डी एक बार में 150 अंडे तक देती है। ऐसा कहा जाता है कि टिड्डियां बड़ी तेजी से बढ़ती हैं।