फतेहाबाद। पति से खर्चा मांगने के मामले में निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में गई महिला की याचिका को हाईकोर्ट ने डिसमिस करते हुए निचली अदालत के फैसल को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने महिला को कहा है कि या तो वह अपना शपथ पत्र दे या फिर डीएनए करवाकर इस बात का सबूत दे कि वह कभी गर्भवती हुई है या नहीं।
हांसी निवासी नविंद्र उर्फ सोनू का विवाह फतेहाबाद की तमन्ना के साथ हुआ था। मनमुटाव के बाद वह तीन चार माह बाद ही अपने मायके आ गई। इसके बाद तमन्ना ने फतेहाबाद की अदालत में केस दर्ज करके पति से गुजारा भत्ता दिलवाने की मांग की थी। इस बीच उसके पति ने भी अदालत को बताया था कि उसकी पत्नी ने उससे बिना तलाक लिए फतेहाबाद के एक अन्य व्यक्ति से शादी की हुई है और उससे उसको बच्चा भी है। महिला ने अदालत में बताया कि उसका आजतक कोई बच्चा नहीं हुआ है। महिला के पति ने अदालत में बताया कि उसकी पत्नी शहर के एक निजी स्कूल में बच्चे को छोड़ने के लिए जाती थी। अदालत ने निजी स्कूल से भी इस मामले में जानकारी ली थी। इसके बाद फतेहाबाद सेशन कोर्ट ने महिला को आदेश दिए थे कि या तो वह शपथ पत्र अदालत में जमा करवाए कि उसके कोई बच्चा नहीं था, अथवा अपना डीएनए करवाए। इस आदेश के खिलाफ महिला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में चली गई। उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के आदेशों को बरकरार रखा है।