गांव बुवान में धर्म परिवर्तन करके दूसरा विवाह रचाने वाले गुरविंद्र पाल उर्फ गोरखा ने अपनी पहली पत्नी व बच्चों को बुवान कोठी घर पर आने के लिए गुहार लगाई है। गोरखा ने अपनी पहली पत्नी सुखविंद्र कौर से बच्चों के भविष्य को मध्य नजर रखते हुए गुमराह करने वाले लोगों से दूर रहने का आह्वान किया है।
शुक्रवार को गोरखा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करके अपना पक्ष पहली पत्नी के समक्ष रखा है।
उन्होंने कहा कि बुवान कोठी व अन्य शहरों में जो भी संपत्ति है वह उसके बेटे व बेटी की है।
बेटी शिरत कौर तीन साल बाद शादी के योग्य हो जाएगी और बेटे और बेटी की पढ़ाई पर भी प्रभाव पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि बुवान कोठी से सुखविंद्र कौर बच्चों सहित खुद गई थी तथा उसे किसी ने चले जाने के लिए नहीं कहा था।
गोबिंद पुरा व बुवान कोठी के कुछ लोग हमारे परिवार की खुशियों में ग्रहण लगा रहे हैं। जिससे उसका पूरा परिवार मानसिक परिस्थितियों से गुजर रहा है।
क्या है मामला :-
बुवान कोठी के सरदार गुरदेव सिंह के इकलौते बेटे गुरविंद्र पाल उर्फ गोरखा ने धर्मपरिवर्तन करके ललौदा गांव की युवती के साथ दूसरी शादी कर ली थी। जिसको वह घरेलू मजबूरी बता रहा है तथा उपरोक्त शादी में अपनी पत्नी सुखविंद्र कौर और उसकी मौसी छिन्दों की सहमति भी जाहिर की है।
धर्म परिवर्तन करके दूसरी शादी रचाने के मामले में 40 गांवों के लोगों ने गुरदेव सिंह के परिवार का सामाजिक रूप से बहिष्कार कर दिया।
जिसके बाद गुरविन्द्र पाल उर्फ गोरखा व उसका पिता मीडिया के मुखातिब होकर अपना स्पष्टीकरण दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उक्त घटना क्रम में दूसरी शादी गोरखे द्वारा रचाया जाना पारिवारिक मजबूरी थी। परंतु अब बच्चों के भविष्य को खराब होने से बचाने के लिए लोगों को हमारा सहयोग देना चाहिए। हमारी संपत्ति पहली पत्नी व दोनों बच्चों की है।