फतेहाबाद। फतेहाबाद खंड की 49 पंचायतों में से खाली रही गांव काताखेड़ी की ग्राम पंचायत के कार्यवाहक सरपंच का अभी तक निर्णय नहीं हो पाया है। गांव काताखेड़ी को इस बार बीसी-ए श्रेणी की महिला के लिए आरक्षित किया गया था, लेकिन गांव में बीसी-ए वर्ग से कोई भी महिला नहीं मिली। प्रशासन ने कोशिश की कि चुने गए पंच एकबारगी सर्वसम्मति से कार्यवाहक सरपंच का निर्णय ले लें, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया है।
चार बार बीडीपीओ कार्यालय में इसके के लिए बैठक हो चुकी है, लेकिन हर बार कोरम पूरा न होने के कारण बैठक को आगे बढ़ाया जा रहा है। सरपंच न होने के कारण गांव में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है और ग्रामीण काफी परेशान दिखाई दे रहे हैं। प्रदेश में पंचायती राज चुनाव के तीसरे चरण में फतेहाबाद में 25 नवंबर को मतदान हुआ था। फतेहाबाद खंड की 49 ग्राम पंचायतों के लिए यह चुनाव होने थे, जिनमें फतेहाबाद से लगता गांव काताखेड़ी भी शामिल था। गांव काताखेड़ी को इस बार बीसी-ए वर्ग की महिला सरपंच के लिए आरक्षित किया गया था। वहीं पंच पद के लिए वार्ड नंबर-पांच को भी बीसी-ए वर्ग के लिए आरक्षित किया गया। विडंंबना यह रही कि इस गांव में बीसी-ए वर्ग का कोई भी व्यक्ति नहीं रहता, जिस कारण सरपंच पद व वार्ड नंबर-पांच के लिए कोई आवेदन नहीं आया और गांव काताखेड़ी में कार्यवाहक सरपंच का फैसला नहीं हो पाया।
सात पंचों में से चुने गए थे छह पंच
गांव काताखेड़ी में सरपंच व वार्ड नंबर-पांच को छोड़कर छह पंच चुने गए। इनमें वार्ड नंबर-एक से सुरेंद्र सिंह, वार्ड नंबर-दो से किरण कौर, वार्ड नंबर तीन से काला सिंह, वार्ड नंबर चार से सुरेंद्र कौर, वार्ड नंबर छह से आशा रानी व वार्ड नंबर-सात से संदीप सिंह गांव के पंच बने।
चार बार बुलाई पंचों की बैठक, नहीं हुआ कोरम पूरा
गांव काताखेड़ी को लेकर प्रशासन का प्रयास है कि यहां पर किसी एक महिला पर सर्वसम्मति जताकर उसे सरपंच बना दिया जाए, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। प्रशासन ने 20 फरवरी 2023, छह मार्च, 28 मार्च व 25 मई को चार बार सरपंच पर सहमति के लिए खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी कार्यालय में पंचों की बैठक बुलाई गई। लेकिन शुक्रवार को भी केवल तीन ही पंच मौके पर पहुंचे और कोरम पूरा न होने के कारण सरपंच पद का सर्वसम्मति से फैसला नहीं हो पाया।
गांव के हालात बदहाल
गांव में सरपंच न होने के कारण गांव मुलभूत सुविधाओं से वंचित हो गया है। गांव में जलनिकासी, टूटी गलियों व नालियों के अलावा पेयजल की समस्या बनी हुई है। सरपंच के मार्फत ही ग्राम पंचायत प्रस्ताव पास करके काम करवा सकती है, लेकिन गांव में नई ग्रामीण सरकार बनने के बाद भी काताखेड़ी जहां समस्याओं से जूझ रही है, वहीं नए काम भी नहीं हो पा रहे।
गांव में विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं, क्योंकि सरपंच ही नहीं है। गांव को बीसी-ए वर्ग के लिए आरक्षित करने से पहले सरकार को देखना चाहिए था कि गांव में इस वर्ग की जनसंख्या है या नहीं। अब हम परेशान हैं और सर्वसम्मति से सरपंच भी नहीं बन पा रहा है।
-सुरेंद्र सिंह, पंच वार्ड नंबर-एक, काताखेड़ी
गांव काताखेड़ी में सर्व सम्मति से सरपंच बनाए जाने के लिए चौथी बार बैठक बुलाई गई थी, जिसमें छह पंचों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन इनमें केवल तीन ही पंच हाजिर हुए, कोरम पूरा न होने के कारण सरपंच का फैसला नहीं हो पाया है और अब आगे तिथि दी जाएगी अथवा गांव में सरपंच पद के लिए दोबारा चुनाव होंगे। रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंप दी गई है।
-भजनलाल, बीडीपीओ फतेहाबाद