फतेहाबाद। मेडिकल नशे के कारण युवाओं के हाथ और पैर गल रहे है और गहरे घाव हो रहे है। हालात यह है कि घाव होने के बाद ये युवा नशा लेना बंद नहीं कर रहे हैं तो हालत गंभीर हो रही है। पुलिस की नशा मुक्ति टीम ने ऐसे कई युवाओं को उपचार देकर नई राह भी दिखाई है और रोजगार भी शुरू करवाया है।
पुलिस विभाग की नशा मुक्ति टीम का कहना है कि जिले में अब तक सर्वे के दौरान 3133 युवा चिह्नित किए गए है जो कि नशा पीड़ित हैं। इनमें से 2964 का उपचार शुरू किया गया है। काउंसिलिंग और उपचार से 377 पीड़ित नशा छोड़ चुके हैं। नशा मुक्ति टीम इंचार्ज एसआई सुंदर मुसाफिर का कहना है कि उनकी टीम पूरे जिले में सर्वे कर रही है और ऐसे युवाओं को पता लगा रही है जो कि नशे के दलदल में फंसे हैं।
जब वे इन युवाओं से मिलते हैं कई ऐसे होते हैं जिनके हाथ और पैर नशे के कारण गल चुके होते हैं। इसका कारण मेडिकल नशे का घोल बनाकर हाथ-पैर में टीका लगाना बन रहा है। इन टीकों से नसें बंद हो जाती है। जब तक समझ आता है तब तक इसकी लत लग चुकी होती है पर ये टीके लगाना नहीं छोड़ते हैं।
ऐसे में इन युवाओं की काउंसिलिंग की जाती है और उपचार शुरू करवाया जाता है। इस प्रक्रिया का निरंतर फॉलोअप लिया जाता है। इसका नतीजा यह निकला की अब तक 377 युवा नशा छोड़ चुके हैं और कई ने अपना रोजगार भी शुरू कर लिया है।
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नशे से पैर गले, तनाव में गया, अब वेटर का कर रहा काम
बलजीत सिंह का कहना है कि 6 वर्ष तक मेडिकल नशा और चिट्टे के सेवन से उसके हाथ-पैर तक खराब हो चुके थे। मां दुर्घटना में घायल हुई। नशा मुक्ति टीम ने उसे अस्पताल में दाखिल करवाया, दवा और देखभाल के साथ-साथ काउंसिलिंग शुरू की। बलजीत अब नशा छोड़कर वेटर का काम कर रोजाना लगभग 500 रुपये कमा रहा है।
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पिता की मौत बाद नशे के दलदल में धंसा
पिता के निधन के चलते तीन साल तक लगातार नशे में डूबे रोहताश ने पढ़ाई, नौकरी और चार दोस्तों को खो दिया। नशा मुक्ति टीम ने काउंसिलिंग की। उपचार के चलते अब वह नशे के दलदल से बाहर है। रोहताश पूरी तरह से नशा मुक्त है और वह अपने पिता का कारोबार संभाल रहा है।
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16 साल की उम्र में लगाया नशे का इंजेक्शन
साजन ने 16 वर्ष की उम्र में चिट्टे का इंजेक्शन लगाया। झाड़ियों में छिपकर इंजेक्शन लगाना उसकी दिनचर्या बन गई। लगातार इंजेक्शन से उसके हाथ-पैर सड़ने लगे। उसका सबसे करीबी दोस्त नशे में मर चुका है। साजन अब उपचार ले रहा है और उसमें काफी सुधार है।
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प्रतिबंधित गोलियों को घोलकर लगाए इंजेक्शन, पैरों में भरी पस
गांव तामसपुरा का युवक रोजाना प्रतिबंधित गोलियों को घोलकर उसके इंजेक्शन नस में लगाने लगा। इससे उसके हाथ-पैर में पस भर गई। परिवार ने उम्मीद छोड़ दी थी। नशा मुक्ति टीम ने आयुर्वेदिक उपचार, लेप और लगातार काउंसिलिंग से न सिर्फ उसके घाव ठीक किए, बल्कि उसके मन में फिर से जीने की चाह जगाई। अब वह इंजेक्शन लगाना छोड़ चुका है और उसे रोजगार के लिए तैयार किया जा रहा है। उसकी आंखों की चमक इस मिशन की सबसे सुंदर तस्वीर है।
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पुलिस का काम सिर्फ अपराध रोकना नहीं होगा, बल्कि समाज को टूटने से भी बचाना होगा। इसी उद्देश्य से नशा मुक्ति टीम का गठन किया गया है। टीम ने उन युवाओं के पास जाकर काम शुरू किया, जो घर-परिवार और समाज से लगभग कट चुके थे। सैंकड़ों युवा नशे से बाहर आकर काम कर रहे हैं, परिवार में सम्मान पा रहे हैं और नई जिंदगी बुन रहे हैं।
सिद्धांत जैन, पुलिस अधीक्षक, फतेहाबाद।