फतेहाबाद। पढ़ाई, परीक्षा और कॅरिअर की चिंता से लेकर नौकरी और आर्थिक परेशानियों तक का दबाव युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। नींद न आना, बेचैनी, तनाव और मोबाइल व सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल भी चिंता बढ़ा सकता है।
जिले में स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में बढ़ोतरी दिखा रहे हैं। इस साल दूसरी तिमाही में मानसिक स्वास्थ्य ओपीडी में 4260 मरीज पहुंचे जबकि पहली तिमाही में यह संख्या 3295 थी। गंभीर अवसाद के मामले पहली तिमाही के आठ से बढ़कर दूसरी तिमाही में 273 हो गए।
आत्महत्या के जोखिम वाले मरीजों की संख्या भी 10 से बढ़कर 36 पहुंच गई। जिले में हर चौथे दिन आत्महत्या का एक मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार सिजोफ्रेनिया के मामले 59 से बढ़कर 353 दर्ज किए गए। बाइपोलर डिसऑर्डर के मरीजों की संख्या 17 से बढ़कर 24 हो गई।
तंबाकू, शराब और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़े विकारों के मामले भी पहली तिमाही के 617 से बढ़कर दूसरी तिमाही में 829 हो गए। वहीं मिर्गी के मरीजों की संख्या 76 से बढ़कर 146 दर्ज की गई।
एंग्जायटी और पैनिक डिसऑर्डर के मामले भी बढ़े
रिपोर्ट के मुताबिक सामान्य मानसिक विकारों के कुल मामले 2497 से घटकर 2350 रह गए। अवसाद के मामले भी 1986 से घटकर 1610 दर्ज किए गए। हालांकि एंग्जायटी और पैनिक डिसऑर्डर के मामले 494 से बढ़कर 730 हो गए। लगातार तनाव, पारिवारिक विवाद, आर्थिक तंगी, रोजगार की चिंता, नींद की कमी और सामाजिक अलगाव मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। शराब और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन भी परेशानी बढ़ा सकता है।
शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज
मनोचिकित्सक डॉ. गिरीश का कहना है कि लंबे समय तक उदासी, बेचैनी, नींद या भूख में बदलाव, लोगों से दूरी बनाना और व्यवहार में अचानक परिवर्तन जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में मनोचिकित्सक या प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति में आत्महत्या के विचार या खुद को नुकसान पहुंचाने के संकेत दिखें, तो उसकी बात गंभीरता से सुनें, उसे अकेला न छोड़ें और तत्काल पेशेवर या आपातकालीन सहायता लें।