फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नरमे का रकबा घटा, धान की खेती में हुई बढ़ोतरी

विज्ञापन
गांव अयाल्की के खेत में पकी धान की फसल। - फोटो : Fatehabad
विज्ञापन
फतेहाबाद। जिले में इस बार बारिश व नरमा की फसल में आ रही बीमारियों को लेकर किसानों का रुझान धान की फसल की ओर अधिक हुआ है। जिले में इस बार एक लाख 31 हजार 700 हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई हुई है। वहीं नरमे का रकबा पिछले साल की अपेक्षा पांच हजार हेक्टेयर कम हो गया है।
विज्ञापन

जिले में पिछले साल किसानों ने 64 हजार हेक्टेयर पर नरमा की बिजाई की थी। वहीं पिछले साल ही 1 लाख 29 हजार 196 हेक्टेयर पर धान की बिजाई हुई। पिछले साल नरमे पर गुलाबी सुंडी व सफेद मक्खी का प्रकोप होने के कारण किसानों को भारी नुकसान हुआ। जिस कारण किसानों का रूझान नरमा की फसल की ओर कम हो गया। जिले में पिछले साल की अपेक्षा इस बार धान का रकबा काफी बढ़ गया है। पिछले साल जहां एक लाख 29 हजार 196 हेक्टेयर पर धान की बिजाई हुई थी, वहीं इस बार 1 लाख 31 हजार 700 हेक्टेयर पर धान की बिजाई हुई है। वहीं मेरी फसल मेरा ब्यौरा के तहत भी किसानों ने 5500 हेक्टेयर पर धान की सीधी बिजाई की है। जिससे धान का रकबा काफी बढ़ा है।
इस बार बारिश ने किया परेशान
इस बार नरमा का रकबा पांच हजार हेक्टेयर घटकर 59 हजार हेक्टेयर पर रह गया। नरमा की बिजाई हुई तो मार्च माह में एकाएक तापमान बढ़ गया, जिस कारण नरमा की फसल खराब होने लगी। कई गांवों में किसानों को नरमा की फसल जलने के कारण दोबारा से इसकी बिजाई करनी पड़ी। इसके बाद नरमा की फसल बारिश के कारण बदहाल हो गई। जुलाई माह में इस बार हुई जमकर बारिश के कारण क्षेत्र के अनेक गांवों में महीनों तक जलभराव रहा, जिस कारण नरमा की फसल तबाह हो गई। कई गांवों में किसानों ने नरमा को उखाड़कर वहां पर धान लगाना उचित समझा।
विज्ञापन

पांच सालों में धान की रोपाई का डाटा
वर्ष रोपाई
2018 123600
2019 128744
2020 125963
2021 129196
2022 131700
कोट
पिछले साल नरमा की फसल में आई बीमारी के कारण किसानों का नरमा की फसल की ओर कम रुझान रहा है। पिछले साल की बजाए इस बार पांच हजार हेक्टेयर में नरमा की बिजाई कम हुई है, वहीं धान का रकबा बढ़ा है।
विज्ञापन

-राजेश सिहाग, उपनिदेशक, कृषि विभाग, फतेहाबाद
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें