शहर के मुख्य रोड पर स्थित दुर्गा मंदिर पर लगा ताला। संवाद
फतेहाबाद। इस वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण मंगलवार को रहा। इस कारण फाल्गुन पूर्णिमा होने के बाद भी मंदिरों के कपाट बंद रहे। सूतक काल के चलते सुबह से ही अधिकांश मंदिरों के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए गए।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण शुरू होने से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल प्रभावी हो जाता है जिसे आध्यात्मिक दृष्टि से अशुद्ध समय माना जाता है। दुर्गा मंदिर, हनुमान मंदिर और खाटू श्याम मंदिर में मंगलवार सुबह आरती के तुरंत बाद पट बंद कर दिए गए। पुजारियों ने बताया कि सूतक काल सुबह लगभग 6:23 बजे से शुरू हो गया था जिसके चलते भगवान की मूर्तियों को स्पर्श करना और पूजा करना वर्जित रहता है।
मंगलवार का दिन होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु हनुमान मंदिर में माथा टेकने पहुंचे थे लेकिन मुख्य द्वारों पर ताले लटके देख उन्हें बाहर से ही भगवान को हाथ जोड़कर संतोष करना पड़ा। मंदिर समितियों ने प्रवेश द्वारों पर सूचना पट चस्पा किए थे जिन पर ग्रहण के समय और कपाट खुलने के मुहूर्त की जानकारी दी गई थी।
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ग्रहण का समय और धार्मिक महत्व
ज्योतिष महेंद्र प्रसाद के अनुसार, शास्त्रों के अनुसार ग्रहण काल में देव-दर्शन निषेध हैं। इसलिए मर्यादा का पालन करते हुए कपाट बंद रखे गए हैं। शुद्धि के बाद बुधवार सुबह ही भक्तों के लिए द्वार खुलेंगे। यह चंद्र ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू हुआ और शाम 6:47 बजे समाप्त हुआ।