टोहाना भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला का विधानसभा क्षेत्र भी है,
लेकिन चावल उद्योग पर गहराते संकट पर सरकार की खामोशी रहस्य से भरी हुई है।
डॉ. तंवर ने कहा कि चावल के एक्सपोर्ट में कमी और राज्य सरकार की गलत
नीतियों की वजह से शैलर व्यवसायी घोर आर्थिक दबाव में हैं। इसी तरह से चीनी
मिलों पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा
कि ईरान, इराक और अन्य खाड़ी देशों में एक्सपोर्ट कम होने और अन्य कारणों
की वजह से व्यवसायियों का पैसा फंसा हुआ है।
हरियाणा में धान की खरीद पर
करीब 9 फीसदी टैक्स लगता है और प्रदेश में कस्टम मिलिंग रेट मात्र 15 रुपए
क्विंटल है। उनकी मुलाकात राइस शैलर्स के मालिकों से हुई है। हाल ही में
दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की सरकारों और चंडीगढ़ यूटी ने एक
समान दर करने के नाम पर पेट्रोल और डीजल पर वैट बढ़ा दिया था, जबकि धान पर
पंजाब में टैक्स माफ है।
डॉ. तंवर ने कहा कि यह सरकार झूठ की बुनियाद पर
टिकी हुई है। चुनावों के दौरान किया गया एक भी वादा इस सरकार ने पूरा नहीं
किया और यही वजह है कि पूरे प्रदेश में हाहाकार मचा हुआ है।