कुलां। क्षेत्र के गांव नन्हेड़ी के किसान सुशील शर्मा ने धान, गेहूं, बाजरा और सरसों जैसी परंपरागत खेती को छोड़कर फल की खेती कर रहे हैं। जिससे किसान ने अन्य किसानों की तुलना में कुछ अलग कर दिखाया है। प्रगतिशील किसान सुशील शर्मा ने अपनी लगन और मेहनत के साथ नई तकनीक से मात्र आधा एकड़ भूमि में ही ड्रैगन फ्रूट की खेती कर सालाना दो लाख रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं।
किसान सुशील शर्मा ने बताया कि उन्होंने दो साल पहले अपने किसी रिश्तेदार से प्रेरित हो कर ड्रैगन फ्रूट की खेती की शुरुआत की है। ड्रैगन फ्रूट की फसल दो सालों के बाद फल देना शुरू कर देती है। उसके बाद कई वर्षों तक पैदावार देती है। जिससे किसान इससे लंबे समय तक मुनाफा कमा सकता है। प्रगतिशील किसान सुशील शर्मा के पास कम भूमि है। ऐसे में परंपरागत खेती से उनको कम आय हो रही थी। जिसके बाद उन्होंने अपनी आय को बढ़ाने के लिए ड्रैगन फ्रूट की खेती की शुरुआत की है। ड्रैगन फ्रूट की खेती में कम लागत आती है और पानी की भी बचत होती है। ड्रैगन फ्रूट के पौधे पर फल जून माह में आना शुरू होता है। जिसके 35 दिन बाद फल पूरी तरह पककर तैयार हो जाता है।
प्रति किलो 250 का मिलता है भाव
किसान ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट के एक फल का वजन 300 से 400 ग्राम तक होता है। बाजार में एक ड्रैगन पीस फ्रूट का रेट 80 से 100 रुपये तक है। ये फल एक पिलर पर 10 किलो से 12 किलो तक आता है। ड्रैगन फ्रूट की खेती की विशेषता ये भी है कि इसके पौधों में रोग और कीट नहीं लगते हैं। अब तक इसके पौधों में किसी तरह के कीट लगने या बीमारी होने का कोई भी मामला सामने नहीं आया है। इस तरह से इसकी खेती में कीटनाशकों का प्रयोग भी न के बराबर होता है। जिससे किसान का कीटनाशकों पर होने वाला भारी खर्च भी बच जाता है।