फतेहाबाद। जिले के नागरिक अस्पतालों में चिकित्सकों की अनिश्चतकालीन हड़ताल के दूसरे दिन शुक्रवार को भी हाहाकार मचा रहा, अस्पताल आए मरीजों को न तो दवा मिली और नही उपचार। जिले के कुल 78 चिकित्सकों में से 65 चिकित्सक हड़ताल पर रहे। स्वास्थ्य विभाग की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था न बना पाने के कारण नागरिक अस्पताल में व्यवस्था बिगड़ी रही। जिला नागरिक अस्पताल के आपातकाल कक्ष में भी कोई डॉक्टर नहीं रहा। इस कारण अस्पताल में दाखिल मरीजों की देखरेख भी नर्सिंग स्टाफ को ही करनी पड़ी।
बता दें कि नागरिक अस्पताल में ओपीडी खिड़की के बाहर मरीजों की संख्या बाकी दिनों की तुलना में कम रही। इमरजेंसी वार्ड में मरीजों के लिए 10 बेड की व्यवस्था है, लेकिन हड़ताल के चलते केवल दो ही बेड पर मरीज दाखिल रहे। अस्पताल में उपचार और दवा लेने के लिए आने वाले मरीजों को कोई डॉक्टर नहीं मिल सका और न ही किसी को दवा मिली। वहीं, पंजाब के पटियाला में नहर में डूबने से गुरनाम सिंह की मौत हो गई थी। शव भूना के ढाणी गोपाल के पास नहर से बरामद हुआ। मगर चिकित्सकों और एनएचएम की हड़ताल के चलते दो दिनों तक शव का पोस्टमार्टम नहीं हो सका। मृतक के भांजे लखविंद्र सिंह ने बताया कि पुलिस कार्रवाई हो चुकी गई। मगर दो दिनों से पोस्टमार्टम नहीं हो सका। इसके बाद पंजाब पुलिस को बुलाकर शव को बिना पोस्टमार्टम करवाए पटियाला ले जाना पड़ा है।
महिला और शिशु रोग विशेषज्ञ की चलती रही ओपीडी
नागरिक अस्पताल में महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. वर्षा, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. वरुण मुंजाल, अनुबंधित कंसलटेंट डॉ. सुनीता सोखी व डेंटल रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश की ओपीडी जारी रही। इसके अलावा चर्म रोग विशेषज्ञ, आपातकाल विभाग, दंत रोग विशेषज्ञ, छाती रोग विशेषज्ञ, एनेथीसिया, मनोरोग विशेषज्ञ की ओपीडी बंद रही।
निजी अस्पतालों की बढ़ी ओपीडी
नागरिक अस्पतालों के चिकित्सकों की हड़ताल के कारण सामान्य रोगों के मरीजों ने निजी अस्पतालों व क्लीनिक की ओर से रुख किया। मध्यमवर्गीय परिवार के लोगों ने निजी अस्पतालों में 300 रुपये की फीस देकर ओपीडी की पर्ची कटवाई। वहीं, 300 रुपये खर्च नहीं कर पाने वाले मरीजों ने आरएमपी चिकित्सकों व क्लीनिक का रुख किया। आईएमए के प्रधान डॉ. पवन मेहता ने बताया कि निजी अस्पतालों में दो दिन से 10 से 20 फीसदी तक ओपीडी बढ़ी हैं। गांवों से जो डॉक्टर को दिखाने आया है। अगर उसे सरकारी अस्पताल में चिकित्सक नहीं मिला तो उसे निजी अस्पताल आना पड़ा है।
मरीज खाली हाथ लौटे, बोले- फिर आना पड़ेगा अस्पताल
मेरे घुटनों में दर्द है, जिसके लिए मैं नागरिक अस्पताल में दवाई लेने आई। मगर डॉक्टरों की हड़ताल के चलते मुझे दवा नहीं मिल सकी है। अब हड़ताल खुलने के बाद दोबारा अस्पताल में आना पड़ेगा।
-सिलोचना, निवासी, गांव जांडवाला सोत्तर
कई दिनों से पेट में दर्द है, जिसकी दवा नागरिक अस्पताल फतेहाबाद से ले रही हूं। हड़ताल के चलते मुझे डॉक्टर नहीं मिल सके। पेट दर्द से परेशानी के कारण मुझे चलने फिरने में दिक्कत होती है। अब दोबारा दवा लेने के अस्पताल में आना पड़ेगा।
-माया देवी, निवासी, गांव शेखूपुर सोत्तर
कान में दर्द से परेशान होने के कारण मुझे हर सप्ताह दवाई लेने के लिए अस्पताल आना पड़ता है। हड़ताल के चलते कान, गला और नाक विशेषज्ञ डॉक्टर जयप्रकाश नहीं मिल सके। इस कारण बिना जांच करवाए ही जाना पड़ा।
-बिमला, निवासी, गांव अयाल्की
मेरी छाती में दर्द होने के कारण मैं नागरिक अस्पताल में अपने दादाजी को साथ लेकर दवा लेना आया। मगर उपचार नहीं मिला। मैं जन्म से ही दिव्यांग हूं, जिसके कारण व्हील चेयर से चलता हूं। मैं गांव बीघड़ से ई-रिक्शा से पहुंचा हूंं। अब दोबारा आना पड़ेगा।
-संदीप, निवासी, गांव बीघड़
कोट
महिला रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ व डेंटल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी जारी रही है। अनुबंध आधार पर लगे चिकित्सकों ने भी ड्यूटी दी है। पहले से दवा ले रहे मरीजों को काउंटरों से दवा मिल गई है।
-डॉ. संगीता अबरोल, कार्यकारी सिविल सर्जन