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हड़ताल : तीन दिन से 750 ड्राइविंग लाइसेंस और 600 रजिस्ट्री पर नहीं चली लिपिकों की कलम

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लिपिकों के धरने को संबो​धित करते पूर्व सीपीएस प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा।
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फतेहाबाद। तीन दिन से लिपिकों की कलम सरकारी फाइलों पर नहीं चली है। लिपिकों की हड़ताल के चलते तीन दिन में 750 ड्राइविंग लाइसेंस और 600 रजिस्ट्री की फाइलें पास नहीं हो सकी। अब शनिवार और रविवार को दो दिनों की छुट्टी होने के कारण सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे। अब सोमवार को ही सरकारी कार्यालय खुलेंगे।
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क्लेरिकल एसोसिएशन वेलफेयर सोसाइटी के बैनर तले शुक्रवार को लिपिकों ने बेसिक वेतन 35400 की मांग को लेकर लघु सचिवालय के गेट पर पार्क में धरना जारी रखा। धरने की अध्यक्षता जिला प्रधान संदीप पूनिया ने की। उन्होंने कहा कि अब तक सरकार की ओर से हमारे से कोई संपर्क नहीं किया गया है, हमें बिल्कुल पराया कर दिया गया है। जब तक सरकार हमारी मांग पूरी नहीं करती तब तक पूर्ण रूप से ऐसे ही हड़ताल जारी रहेगी। धरने को पूर्व सीपीएस प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा व भीम आर्मी के पदाधिकारियों ने समर्थन दिया।
पोर्टल से होने वाले काम भी रुके
पिछले तीन दिन से हड़ताल के कारण पोर्टल पर होने वाले कामकाज भी रुके हुए हैं। राजस्व विभाग की रजिस्ट्री, ड्राइविंग लाइसेंस, आरसी, ई दिशा, ट्रेजरी, सिंचाई विभाग, पीडब्ल्यूडी, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग के काम पूर्ण रूप से बंद पड़े हैं। नगर परिषद कार्यालय में प्रॉपर्टी टैक्स जमा करने और प्रॉपर्टी आईडी की त्रुटियों को ठीक करने का काम भी बाधित पड़ा है। उपायुक्त कार्यालय की सेवादार यूनियन ने भी ऐलान किया कि यदि रविवार तक लिपिक वर्ग की मांग पर सरकार कार्रवाई नहीं करेगी तो सोमवार से वे भी समर्थन में आ जाएंगे। रोडवेज यूनियन पदाधिकारियों ने भी दावा किया कि जरूरत पड़ने पर एक दिन के लिए पूर्ण रूप से चक्का जाम करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
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धरने को चलाने के लिए विभागों से चंदा जुटना शुरू
धरने को सुचारू रूप से चलने के लिए विभिन्न विभागों द्वारा चंदा देने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। स्वास्थ्य विभाग, नगरपालिका यूनियन, काडा व सिंचाई यूनियन, पीडब्ल्यूडी इलेक्ट्रिक व सिविल विंग, हरियाणा रोडवेज लिपिक वर्ग, जिला कल्याण विभाग, पीडब्ल्यूडी हांसी, समाज कल्याण विभाग आदि विभागों से कर्मचारियों ने चंदा भिजवाया।

लोग बाेले- हड़ताल के नहीं हो रही कोई सुनवाई
मैं जन्म से ही दिव्यांग हूं। रिक्शा के सहारे से ही चलता हूं। मैं अपने कार्य से संबंधित शिकायत पत्र देने के लिए लघु सचिवालय में आया था। मगर लिपिकों की हड़ताल के चलते मेरी कोई सुनवाई नहीं हुई। मुझे हड़ताल खत्म होने के बाद ही आने के लिए कहा गया है।
-राजेश, निवासी, भट्टू कलां
मैं बुढ़ापा पेंशन बनवाने के लिए लघु सचिवालय में आया था। मगर लिपिकों की हड़ताल के चलते मेरी कोई सुनवाई नहीं हुई। मुझे लघु सचिवालय में पहुंचने के बाद पता चला कि लिपिकों की हड़ताल चल रही है। अब मुझे हड़ताल खत्म होने के बाद आने को बोला गया है।
-केहर सिंह, निवासी, गांव बनगांव
मेरी बुढ़ापा पेंशन बंद हाे गई हैं। इसी मामले को लेकर मैं लघु सचिवालय में आई थी। यहां आने के बाद मुझे पता चला कि लिपिकों की हड़ताल चल रही है। मेरे घुटनों में दर्द होने के कारण मुझे चलने फिरने में परेशानी होती है। फिर भी अब हड़ताल खत्म होने के बाद ही मजबूरन दोबारा आना पड़ेगा।
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-शिमला बाई, निवासी, गांव लांबा
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