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Fatehabad News: गर्भावस्था में तनाव शिशु की जान पर भारी, हृदय हो रहा कमजोर

Mon, 11 May 2026 11:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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फतेहाबाद के नागरिक अस्पताल में स्क्रीनिंग करते हुए विशेषज्ञ स्त्रोत स्वास्थ्य विभाग
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फतेहाबाद। गर्भावस्था में लिया गया तनाव शिशु की जान पर भारी पड़ रही है। शिशु का हृदय कमजोर हो रहा है। यही नहीं वे कई अन्य जन्मजात बीमारियों से भी ग्रस्त हो रहे हैं। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र में 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों की स्क्रीनिंग की जा रही है। पिछले वर्ष 66 बच्चों के ऑपरेशन स्वास्थ्य विभाग ने निशुल्क करवाए। इनमें 16 बच्चों के दिल में छेद मिला।
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स्वास्थ्य विभाग ने इन बच्चों की सर्जरी नारायणा हृदयालय जयपुर, फोर्टिस अस्पताल मोहाली और पीजीआई चंडीगढ़ में करवाई। उपचार के बाद सभी बच्चे स्वस्थ बताए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की लापरवाही जन्मजात बीमारियों का बड़ा कारण बन रही है। कई नवजात दिल में छेद, टेढ़े-मेढ़े पैर, कटे-फटे होंठ, आंखों में भेंगापन और मोतियाबिंद जैसी समस्याओं के साथ जन्म ले रहे हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि गर्भावस्था में संतुलित खानपान की अनदेखी, अधिक तनाव, शराब सेवन और बिना चिकित्सकीय सलाह दवा लेने का असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं से नियमित जांच और चिकित्सकीय परामर्श लेने की अपील की है। संवाद
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विभाग ने करवाई 66 सर्जरी

स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जिला आरंभिक हस्तक्षेप केंद्र में जांच के बाद विभाग की तरफ से हृदय में छेद के 16 ऑपरेशन, आंखों में मोतियाबिंद और भेंगापन के 5, कटे-फटे होंठ की 27 और टेढे-मेढ़ पैर के 21 बच्चों की सर्जरी करवाई गई है। इन सबका

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अग्रोहा मेडिकल भी पैनल में हुआ शामिल

स्वास्थ्य विभाग ने जन्मजात रोग से ग्रस्त बच्चों की सर्जरी के लिए अग्रोहा मेडिकल को भी पैनल में लिया है। बच्चे के आंखों के मोतियाबिंद और भेंगापन के ऑपरेशन अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में भी हो पाएंगे।

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गर्भावस्था में महिलाओं के लापरवाही बरतने से शिशु जन्मजात रोग से ग्रस्त हो जाता है। महिलाओं को गर्भावस्था में खानपान पर ध्यान देना चाहिए। डॉक्टर के सलाह के बिना दवाई न ली जाए।

- डॉ. हिमांशु, फिजियोथेरेपिस्ट

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स्वास्थ्य विभाग की टीमें स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग करती है। जांच के दौरान अगर कोई बच्चा जन्मजात रोग से ग्रस्त मिलता है तो उसे जिला मुख्यालय पर रेफर किया जाता है। यहां से संबंधित बच्चे के उपचार को लेकर प्रक्रिया शुरू की जाती है। विभाग की तरफ से 0 से 18 साल के बच्चे के ऑपरेशन निशुल्क करवाए जाते हैं।
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- डॉ. लाजवंती गौरी, उप सिविल सर्जन
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