फतेहाबाद। जिले में धूम्रपान की लत किशोरों तक पहुंच रही है। महिलाएं भी इसकी चपेट में आने लगी हैं। नागरिक अस्पताल में संचालित तंबाकू नियंत्रण केंद्र के आंकड़े इस बढ़ती प्रवृत्ति की ओर संकेत करते हैं। बड़ी संख्या में लोग धूम्रपान छोड़ने की उम्मीद से इलाज शुरू कराते हैं, लेकिन बहुत कम लोग इसे पूरी तरह छोड़ पाते हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार नागरिक अस्पताल के तंबाकू नियंत्रण केंद्र में नवंबर 2022 से अब तक 773 लोग धूम्रपान की लत छोड़ने के लिए पहुंचे। इनमें अधिकतर युवा और मध्यम आयु वर्ग के लोग शामिल रहे। हालांकि इलाज शुरू होने के बाद अधिकांश मरीज फॉलोअप के लिए वापस नहीं आए। इस कारण धूम्रपान छोड़ने की सफलता दर बेहद कम रही है।
केंद्र के रिकॉर्ड के अनुसार अब तक केवल एक व्यक्ति ही ऐसा है, जिसने पूरी तरह धूम्रपान छोड़ने में सफलता हासिल की है। केंद्र में इलाज के लिए पहुंचे लोगों में 6 महिलाएं और 6 किशोर भी शामिल हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान की लत छोड़ने के लिए नियमित परामर्श, दवाइयों और लगातार फॉलोअप बेहद जरूरी है। मरीज अगर बीच में ही उपचार छोड़ देते हैं तो लत से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।
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धूम्रपान से कैंसर का ज्यादा खतरा
नागरिक अस्पताल के टीबी रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष टुटेजा का कहना है कि तंबाकू और सिगरेट का लगातार सेवन फेफड़ों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा रहा है। इससे फेफड़ों की क्षमता धीरे-धीरे कम हो जाती है और व्यक्ति सांस संबंधी बीमारियों की चपेट में आने लगता है। कई मामलों में लंबे समय तक धूम्रपान करने वालों में टीबी और फेफड़ों के कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है। कम उम्र में धूम्रपान शुरू करने से शरीर पर इसका असर और अधिक खतरनाक हो जाता है। किशोर अवस्था में फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं होते, ऐसे में धूम्रपान से उनकी कार्यक्षमता कमजोर होने लगती है।
धूम्रपान छोड़ने के लिए केवल दवा ही नहीं, बल्कि मजबूत इच्छाशक्ति भी जरूरी है। टीसीसी में आने वाले लोगों को काउंसिलिंग और दवाइयों के जरिए धूम्रपान छोड़ने में मदद की जाती है। लोगों से भी अपील की है कि वे अपनी सेहत को ध्यान में रखते हुए धूम्रपान से दूर रहें और अगर लत लग चुकी है तो समय रहते इलाज और परामर्श लें।
-डॉ. गिरीश, मनोरोग विशेषज्ञ