फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पराली और कूड़े के धुएं के गुबार ने फुलाई सांसें

विज्ञापन
भूना क्षेत्र में खेत में पराली में लगी आग। - फोटो : Fatehabad
विज्ञापन
फतेहाबाद। पराली जलाने की बढ़ रही घटनाओं ने आम जन की सांसें फुला दी हैं। बुधवार को इस सीजन में पहली बार पूरे दिन मौसम में धुएं का गुबार छाया रहा। मंगलवार रात्रि को जिले में सबसे अधिक पराली जलाई गई। 24 घंटे में 57 फायर लोकेशन मिली हैं। अब तक जिले में 454 स्थानों पर पराली जल चुकी है। इसी तरह पड़ोसी राज्य पंजाब में भी लगातार पराली जलाने के कारण जिले के वातावरण पर असर पड़ रहा है।
विज्ञापन

हवा में घुल रहे जहर को नगर परिषद के सफाईकर्मी और बढ़ाने का काम कर रहे हैं। शहर में जगह-जगह कूड़े में खुद सफाईकर्मी ही आग लगा रहे हैं। जगजीवनपुरा मोहल्ला व चौधरी कॉलोनी में गलियों के कूड़े को प्लॉटों में डालकर सफाईकर्मी ही आग लगाकर चले जाते हैं। वहीं पराली जलाने वाले किसानों को प्रशासन सिर्फ जुर्माना लगाकर इतिश्री कर रहा है। पराली की आग को रोकने में प्रशासन को सफलता नहीं मिल रही है। अब तक 131 किसानों को तीन लाख 40 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। हालांकि, जुर्माने के बावजूद पराली जलाने के आंकड़े कम होने की बजाय लगातार बढ़ रहे हैं। दिवाली के बाद से औसतन हर रोज 30 से अधिक जगहों पर पराली जली है।
सुबह से शाम तक बढ़ता रहा एक्यूआई का स्तर
जिले में सुबह से लेकर शाम तक एक्यूआई का स्तर खतरनाक स्थिति की ओर बढ़ता रहा। यूं तो सुबह उठते ही एक्यूआई 200 के पार था। वहीं, सुबह 9 बजे 232 एक्यूआई दर्ज हुआ, जो शाम 5 बजे तक 286 तक पहुंच गया।
विज्ञापन

धुएं के गुबार का सीधा स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर
पराली के धुएं का असर सीधा आमजन के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। विशेष तौर पर सांस व एलर्जी के मरीजों की दिक्कत और भी अधिक बढ़ने लगी है। आमजन, बच्चे, बुजुर्ग व जवान सभी लोग पराली के धुंओं के गुबार से परेशान है। नागरिकों की सेहत को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने पिछले दिनों एडवाइजारी भी जारी की थी ताकि लोग धुएं से होने वाली परेशानी से अपना बचाव कर सके।
पिछले एक सप्ताह में पराली जलाने के आंकडे़
27 अक्तूबर : 27
28 अक्तूबर : 37
29 अक्तूबर : 33
30 अक्तूबर : 39
31 अक्तूबर : 24
01 नवंबर : 36
02 नवंबर : 57
पराली के धुएं से स्वास्थ्य पर ये होता है असर
व्यक्ति को चक्कर आने लगते हैं।
सांस लेने में तकलीफ होती है।
व्यक्ति को खांसी होने लगती है।
छाती में तकलीफ हो जाती है।
आंखों में जलन होने लगती है।
क्या करें
ज्यादा जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें।
आंखों में जलन, सांस लेने की तकलीफ या खांसी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
अपने घर में दिल, फेफड़े एवं अन्य गंभीर बीमारी के रोगियों का विशेष ध्यान दें।
धुआं रहित ईंधन का प्रयोग करें।
क्या न करें
ज्यादा प्रदूषित जगहों पर न जाएं।
घरों के खिड़की व दरवाजे सुबह-शाम बंद रखें।
अधिक धुआं होने की स्थिति में सुबह व शाम की सैर टालें।
पटाखे, कूड़ा व पत्तियां आदि न जलाएं।
धूम्रपान से बचें।
एक्यूआई की स्थिति
शाम 5 बजे : 286
शाम 4 बजे : 276
दोपहर 3 बजे : 266
दोपहर 2 बजे : 255
दोपहर 1 बजे : 244
दोपहर 12 बजे : 237
सुबह 11 बजे : 233
सुबह 10 बजे : 232
सुबह 9 बजे : 232
धुएं से आंखों में बढ़ती है जलन: डॉ
पराली जलाने से उठने वाले धुएं से आंखों में जलन, सूखापन, खारिश आना, पानी आना तथा दृष्टि में धुंधलापन की समस्या हो सकती है। इस तरह के लक्षण वाले मरीजों की संख्या नागरिक अस्पताल में दिनोंदिन बढ़ रही है।
-डॉ. राकेश कस्वां, नेत्र रोग विशेषज्ञ
पराली जलाने से कण फेफड़ों में चिपक जाते हैं
पराली जलाने से उत्पन्न कार्बन कण सांस के माध्यम से फेंफड़ों की म्यूकस मेम्ब्रन पर जाकर चिपक जाते हैं, जिससे म्यूकस मेम्ब्रन में सूजन आ जाती है। इससे व्यक्ति अस्थमा, सीओपीडी, धूल-धुएं की एलर्जी से पीड़ित हो जाता है। धुएं के संपर्क में आने से बचना जरूरी है।
-डॉ. अरुण कुमार, उप सिविल सर्जन
बच्चों व बुजुर्गों को सावधानी बरतने की जरूरत
पराली जलाने से उत्पन्न कार्बन मोनोऑक्साइड मानव शरीर में जाकर अंगों से ऑक्सीजन खींच लेती है, जिसके फलस्वरूप शरीर में ऑक्सीजन की कमी होकर चक्कर आना, उल्टी आना, खांसी, छाती में तकलीफ, बेहोशी आना जैसी समस्याएं हो जाती है। पहले से अस्थमा पीड़ित व्यक्ति के गंभीर अवस्था में जाने की संभावना बढ़ जाती है। छोटे बच्चे, बुजुर्ग व गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
-डॉ. मनीष टूटेजा, छाती रोग विशेषज्ञ
नागरिक स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी पर करें गौर
पराली जलाए जाने के चलते स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष एडवाइजरी जारी की गई है। न केवल बीमार व्यक्ति बल्कि आमजन इस एडवाइजरी पर गौर करें और पराली के धुएं से अपना बचाव करें।
डॉ. सपना गहलावत, सीएमओ
कोट
किसान पराली जलाने की बजाय फसल अवशेषों का प्रबंधन करें। प्रबंधन के लिए सरकार एक्स सीटू व इन सीटू के रूप में प्रोत्साहन राशि दे रही है। किसानों को एक हजार रुपये प्रति एकड़ मिलेंगे। पराली के धुएं से न केवल आमजन जीवन प्रभावित हो रहा है, बल्कि पराली जलाने वालों की सेहत पर भी असर पड़ता है।
-जगदीश शर्मा, डीसी, फतेहाबाद

फतेहाबाद के फव्वारा चौक पर कूड़े में लगाई गई आग।- फोटो : Fatehabad

फतेहाबाद शहर में भट्टू रोड पर सुबह 9.55 बजे छाया धुएं का गुबार।- फोटो : Fatehabad

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें