फतेहाबाद। जिले में शुक्रवार सुबह भी गहरी धुंध छाई रही। दोपहर एक बजे बाद हल्की धूप निकलने से कुछ राहत मिली। शीतलहर और कड़ाके की ठंड के बीच खांसी, जुकाम, बुखार, त्वचा रोगों में बढ़ोतरी हुई है। हाथ, पैरों में सूजन, छाले, खुजली और जलन भी हो रही है।
चिकित्सकों के अनुसार इस बीमारी को चिलब्लेंस कहा जाता है। शरीर के बार-बार ठंड के संपर्क में आने से यह स्थिति होती है। नागरिक अस्पताल में त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीत कौर के पास रोजाना 40 से से अधिक मरीजों की ओपीडी हो रही है। इनमें से अधिकतर लोग ऐसी ही बीमारी से पीड़ित हैं।
नजरअंदाज न करें त्वचा का संक्रमण
त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीत कौर ने बताया कि चिलब्लेंस रोग में हाथों और पैरों में सूजन, खुजली के साथ ही लाल धब्बे, फफोले आदि भी हो सकते हैं। ज्यादातर मामलों में मौसम में थोड़ी गर्मी आते ही एक से तीन सप्ताह में सूजन और फफोले ठीक भी हो जाते हैं लेकिन कई बार इनको नजरअंदाज करने से संक्रमण बढ़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि शुरुआत से ही सतर्कता बरती जाए। लोग बहुत कसे हुए कपड़े पहनते हैं या जिनकी त्वचा ठंड के संपर्क में अधिक आती है, उनको ज्यादा दिक्कत होती है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं इस समस्या से अधिक परेशान होती हैं। जिन लोगों में रक्त संचरण सही तरीके से नहीं होता, उनमें भी इस समस्या का खतरा अधिक होता है।
ये करें उपाय
नमी से सुरक्षित रखने वाले जूते पहनें।
कसावट वाले कपड़े और जूते पहनने से बचें।
परेशानी होने पर त्वचा पर मालिश न करें और न रगड़ें।
गर्म कपड़े और पूरी सुरक्षा के बिना ठंड में बाहर न निकलें।
कपड़े ढीले और अधिक पहनें। पतली परत सबसे नीचे, उसके ऊपर शर्ट या टॉप और उसके ऊपर गर्म कपड़े भी पहनें।
हाथों-पैरों, चेहरे को सूखा और गर्म रखें। हाथ बार-बार धोना भी पड़े तो उसे तुरंत सुखा कर मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं।