फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Fatehabad News: हिसार के 22 वाहनों का फर्जी तरीके से पंजीकरण करवाने के मामले में छह आरोपी गिरफ्तार

Thu, 11 May 2023 09:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
विज्ञापन
फर्जी तरीके से वाहनों के पंजीकरण की अमर उजाला में प्रकाशित खबर।
विज्ञापन
फतेहाबाद। आखिरकार पुलिस ने हिसार की बिमला ऑटोमोबाइल एजेंसी में रखे बीएस-टू व बीएस-थ्री श्रेणी के 22 वाहनों के फर्जी तरीके से फतेहाबाद में पंजीकृत कराने के मामले में सवा तीन साल बाद छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में ऑटोमोबाइल एजेंसी के पूर्व संचालक सहित सभी हिसार के निवासी हैं। आरोपियों को वीरवार को अदालत में पेश किया गया। इनमें से एजेंसी के पूर्व संचालक संजय रहेजा को रिमांड पर लिया गया है। शेष पांचों आरोपियों को हिसार जेल भेज दिया गया है। एसपी आस्था मोदी ने इस मामले को कुछ महीने पहले ही इकोनॉमिक सेल को सौंपा था।
विज्ञापन

पुलिस के मुताबिक आरोपी हिसार के पटेल नगर निवासी ओमप्रकाश के नाम 4 स्कूटर, हिसार के जवाहर नगर निवासी नितिन के नाम तीन स्कूटर, हिसार के शांतिनगर निवासी अंकुश के नाम 6 स्कूटर, हिसार के शांति नगर निवासी सचिन कुकरेजा के नाम 5 स्कूटर, हिसार के संत नगर एवं फिलहाल फतेहाबाद के डीएसपी रोड निवासी सौरभ परुथी के नाम दो क्रूजर, हिसार निवासी मनोज के नाम दो क्रूजर गाड़ी हैं। वहीं, सातवां आरोपी बिमला आटोमोबाइल हिसार का तत्कालीन मालिक संजय रहेजा है। इनमें ओमप्रकाश को छोड़कर बाकी सभी छह आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। इन सभी के खिलाफ हुडा चौकी में अगस्त 2022 में धोखाधड़ी सहित विभिन्न मामलों में रिपोर्ट दर्ज किया गया था।
यह था पूरा मामला
गौरतलब है कि 20 जनवरी 2020 को सीएम विंडो पर हिसार की संस्था जवाब दो-हिसाब दो एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सरदाना ने सीएम विंडो पर शिकायत देकर आरोप लगाया था कि वर्ष 2012 में पारिवारिक विवाद के कारण हिसार की एजेंसी बिमला ऑटोमोबाइल को प्रशासन ने सील कर दिया था। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किए कि 31 मार्च 2017 के बाद बीएस-टू व बीएस-थ्री वाहनों को नहीं बेच सकेंगे। मगर, पांच साल पुराने वाहनों को बीएस-4 बनाकर एजेंसी मालिक व छह अन्य लोगों ने मिलकर बेच दिया।
विज्ञापन

सभी का पंजीकरण फतेहाबाद एसडीएम कार्यालय के कर्मचारियों से सांठगांठ करके यहां करवा लिया। आरोप था कि एजेंसी मालिक व कर्मचारियों ने मिलीभगत से 22 वाहनों को पंजीकृत करवाया। इनमें 18 स्कूटर और चार क्रूजर गाड़ी थी। इन सभी वाहनों का 31 जनवरी 2019 और 23 फरवरी 2019 को पंजीकरण करवाया गया। इसके बाद इन वाहनों को आगे बेच दिया गया। सीएम विंडो पर शिकायत के बाद आनन-फानन में तत्कालीन एसडीएम संजय बिश्नोई ने फरवरी 2020 में इन वाहनों की आरसी रद्द कर दी थी।

मुख्यमंत्री कार्यालय ने लिया था संज्ञान
इस केस में मुख्यमंत्री कार्यालय ने गंभीर अपराध माना था। मगर, एसडीएम कार्यालय लिपिकीय गलती मानकर केस को निपटाने में लगा रहा। दो साल तक कभी एसडीएम, कभी डीसी तो कभी सीएम विंडो मुख्यालय के लॉग-इन में केस घूमता रहा। बाद में मुख्यमंत्री कार्यालय और डीसी तक ने क्रिमिनल प्रोसिडिंग चलाने के निर्देश दिए। मगर, फिर भी एसडीएम कार्यालय ने शिकायत को दफ्तर दाखिल करने की ही अनुशंसा कर दी। मुख्यमंत्री कार्यालय ने 21 सितंबर 2020 को एटीआर मांगी थी, लेकिन डिस्ट्रिक अटॉर्नी की राय लेने की बात कहकर एसडीएम कार्यालय ने डेढ़ साल तक मामले को लटकाए रखा।
सीएम विंडो पर लड़ी लड़ाई
दिलचस्प बात यह है कि शिकायतकर्ता ने सारी लड़ाई सीएम विंडो पर तथ्यों के साथ लड़ी। अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा जो भी कागजात सीएम विंडो पर लगाए गए, शिकायतकर्ता ने उनके जवाब में आरटीआई से प्राप्त तथ्यों को लगाया। इस कारण मुख्यमंत्री कार्यालय तक को गंभीरता से हस्तक्षेप करना पड़ा।
हमने तीन साल तक हर मोर्चे पर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संघर्ष किया है। अभी भी पुलिस ने एजेंसी मालिक व वाहन मालिकों को पकड़ा है, जबकि एसडीएम कार्यालय के कर्मचारियों का बचाव कर दिया है। संतोष तब होता, जब मिलीभगत करने वाले कर्मचारी भी पकड़े जाते।
राजीव सरदाना, शिकायतकर्ता

हिसार के 22 वाहनों के फर्जी तरीके से फतेहाबाद में पंजीकरण मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों को अदालत में पेश किया गया है। जहां से एक आरोपी संजय को रिमांड पर लिया गया है, बाकी अदालत के आदेश पर जेल भेज दिए हैं।
विज्ञापन

राजपाल सिंह, प्रभारी, इकोनॉमिक सेल फतेहाबाद
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें