फतेहाबाद। विधानसभा चुनाव से पहले हरियाणा के विभिन्न दलों से जुड़े सिख अब एक झंडे के नीचे एकत्र होंगे। प्रदेश स्तर पर सितंबर माह में आयोजित होने वाले सिख सम्मेलन में सिखों को एकजुट करके विधानसभा चुनाव में भागीदारी सुनिश्चित करवाने सहित कई मांगों को उठाया जाएगा। इस मसले पर करनाल से सिख समाज के प्रतिनिधि फतेहाबाद पहुंचे और यहां के सिख समाज के लोगों के साथ बैठक की।
बैठक में साफ तौर पर कहा गया कि उन्हें पार्टियां 15 से 20 सीटों पर प्रतिनिधित्व दें, प्रदेश के स्कूलों में पंजाबी के अध्यापक भर्ती करें, परीक्षाओं के दौरान विद्यार्थियों को पांच ककारों को उतारने के लिए मजबूर नहीं किया जाए। लोकसभा में तीन सीटों पर प्रतिनिधित्व और सिखों के प्रति सोशल मीडिया पर नफरती पोस्टों पर नकेल के लिए एसआईटी गठित करने सहित कई मांगें उठाई गईं। सिख समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि इन मांगों को लेकर वे सत्तारूढ़ व विपक्षी पार्टियों के सामने जाएंगे, जो उनकी मांगों को पूरा करने का वादा करेगा समाज उनका साथ देगा। यदि कोई भी दल उनकी मांगें नहीं मानता तो समाज अपने बैनरतले चुनाव लड़ेगा और अपने उम्मीदवार उतारेगा।
हरियाणा में सिखों की आबादी 18 लाख
इस दौरान इंटरनेशनल सिख फोरम के महासचिव प्रीतपाल सिंह पन्नू ने कहा कि हरियाणा में सिखों की आबादी लगभग 18 लाख है। मगर, राजनीतिक पार्टियों ने सिखों को पीछे धकेलने के लिए सिख आबादी को जातियों में बांट दिया। इनमें जट्ट सिख को अलग दिखा दिया, खत्री सिखों को पंजाबियों में गिन दिया। रामदासिया, मजहबी सिखों को अनुसूचित जातियों में गिन दिया। जबकि सिख समाज एक ही है और उनसे ज्यादतियां हो रही हैं। पंजाबी भाषा को दूसरी भाषा का दर्जा तो दिया, लेकिन पढ़ाने के लिए अध्यापक ही नहीं दिए। यदि पार्टियों ने सिख समाज के उम्मीदवार नहीं दिए तो समाज इकट्ठा होकर चिह्नित 15 से 20 सीटों पर अपने ऐसे लोगों को खड़ा करेगा, जो लोग 36 बिरादरियों को साथ लेकर चल सकें। बैठक में किसान यूनियन के प्रधान जगदीप सिंह औलख, किसान नेता राणा जोहल, अरविंदर सिंह, गुरुद्वारा सिंह सभा के सचिव मोहिंद्र सिंह वधवा, अवतार सिंह आदि ने विचार व्यक्त किए।