फतेहाबाद। गांव भट्टू बुआन के कर्ण कोट टीले से करीब आठ फुट नीचे शिवलिंगनुमा पत्थर मिला है। पत्थर सैंडी स्टोन से बना है और इस पर पपड़ी भी उतर रही है। लग रहा है कि यह पत्थर करीब पांच-छह हजार साल पुराना है। माना जा रहा है कि यह पत्थर महाभारत काल का हो सकता है, क्योंकि इससे संबंधित कई अवशेष पहले भी यहां मिल चुके हैं। गांव के शोधकर्ता और सेफ्टी इंजीनियर अजय कुमार ने इसकी जानकारी पुरातत्व विभाग को दी है।
जानकारी के अनुसार, गांव के एक किसान ने कर्ण कोट किले के पास जेसीबी से खोदाई का किया था। उसी दौरान तीन दिन पहले जमीन से करीब आठ फुट नीचे शिवलिंगनुमा एक पत्थर निकला। जिसे ग्रामीणों ने गांव के शोधकर्ता अजय कुुमार को दे दिया। संवाद
पत्थर की बनावट शिवलिंग की तरह, तलवारों के निशान
अजय कुमार ने ही इस साइट की खोज की थी। उन्होंने बताया कि यह पत्थर सैंडी स्टोन है और लगभग पांच से छह हजार साल पुराना हो सकता है, जो महाभारतकालीन युग भी था। इस पत्थर की बनावट शिवलिंग की तरह है। इस पर तलवारों के निशान भी हैं और इससे पपड़ी उतर रही है। अमूमन पत्थर पर पपड़ी तभी उतरती है, जब वह सदियों पुराना हो जाए। इसके नीचे पानी के निशान भी दिखाई दिए हैं।
अर्जुन ने की थी यहां भगवान शिव की पूजा
बताया जाता है कि महाभारत काल में अर्जुन ने यहां आकर शिव की पूजा भी की थी, जो पुुराणों में वर्णित है। संभवत: इसी कारण से यहां से महाभारतकालीन प्रमाण मिल रहे हैं। अजय कुमार के बताया कि इसके अलावा यहां से मोती भी मिले हैं, जिससे लगता है कि यहां पर मोतियों की खेती होती थी। यहां से पासे व स्टोन भी मिले हैं। जिससे लगता है कि यहां के रहने वाले लोग काफी समृद्ध थे। हाथी दांत से बनी चूड़ियों के अवशेष भी यहां से मिले हैं।
महाभारत काल का रहा है इतिहास
अजय कुमार ने बताया कि भट्टू गांव टोहाना तहसील में है। कहा जाता है कि जब महाराजा युधिष्ठिर ने यज्ञ किया था तो नकुल यहां पर आए थे। उस समय इस क्षेत्र का नाम तोषाणा पड़ गया। बाद में इसे अंग्रेजों के जमाने में टोहाना कहा जाने लगा। इस साइट पर यह भी माना गया है कि जमीन के नीचे आज भी कर्ण कोट नामक शहर दबा है। तैमूरलंग व औरंगजेब के शासन के दौरान इस शहर को तबाह कर दिया गया।
कोट
गांव भट्टू से अजय का फोन आया था। उसने यहां पर शोध में काफी मदद की है। उसी ने इस साइट के बारे में बताया था। यहां कोई पत्थर मिला है, जो शिवलिंगनुमा बताया जा रहा है। पत्थर कितने साल पुराना है, इसकी जांच की जाएगी
- डॉ. बुनानी भट्टाचार्य, डिप्टी डायरेक्टर, पुरातत्व विभाग
विभाग के संरक्षण में है पुरातात्विक स्थल
सेफ्टी इंजीनियरिंग कर चुके अजय कुमार बताते हैं कि सात साल पहले 2015 में जब यहां घूम रहे थे तो उन्हें इस क्षेत्र में आटा चक्की, मोती व महलों के परकोटे मिले थे। इन पर रिसर्च करके हरियाणा पुरातत्व विभाग से संपर्क किया। इसके बाद पुरातत्व विभाग की टीम यहां पर पहुंची। टीम को यहां से पुरातत्व से संबंधित और भी सामान मिला। यह पूूरा प्रोजेक्ट उन्होंने ही बनाकर सरकार के पास भेजा था और अब सरकार ने इस क्षेत्र को पंजाब पुरातत्व अवशेष संरक्षण अधिनियम 1964 की धारा 4 व 6 के तहत अपने संरक्षण में ले रखा है। यह स्थान नौ एकड़ में फैला हुआ है। पुरातत्व विभाग ने यहां से मिलने वाले अवशेषों को सहेज कर रखने की जिम्मेदारी उन्हें दे रखी है। अभी तक वह विभाग को बहुत से पौराणिक अवशेष मुहैया करवा चुके हैं। इस टीले की रक्षा के लिए पुरातत्व विभाग ने एक चौकीदार भी रखा हुआ है। इस साइट को देखने के लिए तत्कालीन पुरातत्व विभाग के निदेशक आईएएस अशोक खेमका व कई बड़े अधिकारी भी आ चुके हैं।
प्रदेश सरकार ने बजट में की थी संग्रहालय बनाने की घोषणा
प्रदेश सरकार ने कर्णकोट किले पर पुरातत्व संग्रहालय का निर्माण करवाने के लिए साल 2021 के बजट में घोषणा की थी। इसके बाद साल 2022-23 के बजट में भी इस घोषणा को दोहराया गया। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा था कि संग्रहालय में ऐतिहासिक जानकारियां उपलब्ध होंगी और यहां शोधार्थी भी कार्य करेंगे।
र्ण कोट टीले से मिला शिवलिंगनुमा पत्थर- फोटो : Fatehabad
गांव भट्टू बुआन के कर्ण कोट टीले से मिले मोती, स्टोन व अन्य सामान- फोटो : Fatehabad