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दूसरी शादी में पहली पत्नी की थी रजामंदी

Mon, 16 Nov 2015 11:45 PM IST
फतेहाबाद/ अमर उजाला, ब्यूरो
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 गांव बुवान में धर्म परिवर्तन करके दूसरी शादी रचाने वाले गुरविंद्र पाल सिंह उर्फ गोरखा ने सोमवार को एक नया खुलासा किया है। पत्रकारों से बातचीत में उसने बताया कि धर्म परिवर्तन करके दूसरी शादी रचाने में उसकी पहली पत्नी सुखविंद्र कौर का पूर्ण सहयोग था।

यही नहीं शादी में पहली पत्नी सुखविंद्र और उसकी मौसी छिन्दों भी शामिल थी। इस दौरान उसने पहली पत्नी को सम्मान देने और दोनों बच्चों को अपनी पूरी संपत्ति देने का वादा किया।
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खुशी मोहम्मद उर्फ गोरखा ने कहा उसकी पत्नी को कुछ विरोधी तत्वों ने गुमराह एवं बहला-फुसलाकर भटका दिया है। लेकिन वह उससे बेहद प्यार करता है।

परंतु धर्म परिवर्तन करके दूसरी शादी करना भी उसके लिए मजबूरी थी। जिससे उसकी पहली पत्नी सुखविंद्र कौर भली-भांति परिचित थी।

खुशी मोहम्मद ने कसम खाकर दावा किया है कि हिंदुस्तान में उसकी पूरी संपत्ति बेटा गुरनवजोत व बेटी शिरतकौर के नाम करने के लिए तैयार है।

खुशी मोहम्मद ने कहा कि उसकी दूसरी पत्नी सलमा खातून उर्फ खुशविंद्र कौर से संतान पैदा नहीं करूंगा। इसमें दोनों ने मिलकर सर्वसम्मति से निर्णय लिया है। इसलिए हमें अपने परिवार व बच्चों के साथ खुशहाल जिंदगी व्यतीत करने दें।

उन्होंने कहा कि उनके परिवार को कुछ लोग बिखेरने पर तूले हुए हैं मगर वह अपनी पहली पत्नी सुखविंद्र कौर व दोनों बच्चों को दिलोजान से प्यार करता है।

उन्होंने कहा कि गांव के कुछ शरारती लोगों ने उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया है। लेकिन वह अब मुस्लिम धर्म से संबंध बनाने के बाद भी समाज के नाम पर कुछ लोग बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं।

क्या है मामला :-
गांव बुवान कोठी के गुरविंद्र पाल उर्फ गोखा ने सिक्ख धर्म को छोड़कर इस्लाम धर्म कबूल करके ललौदा की खुशविंद्र कौर के साथ 26 अक्तूबर को दूसरी शादी कर ली थी और 27 अक्तूबर को निकाह का पंजीकरण भी करा लिया था। जिसके बाद पहली पत्नी  सुखविंद्र कौर के मायके के लोगों ने आपत्ति जताई तथा गोरखा की घर में पिटाई भी कर दी थी।

गोबिंद पुरा के लोग अपनी बेटी सुखविंद्र कौर और दोनों बच्चों को साथ ले गए थे। मामले को लेकर 40 गांवों की महापंचायत हुई और गुरविंद्र पाल को मुस्लिम धर्म से निकाह को छोड़ने तथा पहली पत्नी के साथ रहने के लिए दबाव बनाया था।
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परंतु जब वह महापंचायत में नहीं आया तो सिक्ख समुदाय के लोगों ने गुरविन्द्र पाल व उसके पिता गुरदेव सिंह के परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया था। तभी से ही मामले को लेकर विवाद बना हुआ है।
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