हरियाणा में खेल मंत्री संदीप सिंह के बाद अब पंचायत मंत्री देवेंद्र सिंह बबली की भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। फतेहाबाद के गांव नाढोड़ी के सरपंच के खिलाफ राइट टू रिकॉल लाने और बयानबाजी से आहत नरेंद्र मेहरा ने मंत्री की शिकायत राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में की है। सरपंच ने मंत्री व उनके नुमाइंदों द्वारा धमकियां देने, सार्वजनिक तौर पर अपमानित करने का आरोप लगाते हुए जान का खतरा भी बताया है।
चेयरमैन को भेजी शिकायत में सरपंच नरेंद्र मेहरा ने लिखा है कि 2 जनवरी को उनके गांव में पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली आए थे। उनके आने की कोई अधिकारिक सूचना नहीं थी। उस दिन वह रिश्तेदार के साथ बीकानेर गए हुए थे। मंत्री का कार्यक्रम ऐसे व्यक्ति के घर था, जिसके साथ उनकी अनबन है।
सरपंच ने लिखा है कि सरपंच का कार्यभार संभालने के बाद अब तक ग्राम पंचायत ने कोई नया कार्य शुरू नहीं किया है। फिर भी उस पर मंत्री ने गड़बड़ी के आरोप जड़ दिए। सरपंच ने आरोप लगाया कि कुछ दिनों से मंत्री के नजदीकी लोग पुराने विकास कार्यों की पेमेंट करने के लिए उस पर लगातार हस्ताक्षर करने का दबाव बना रहे हैं।
सरपंच का आरोप है कि मंत्री व उनके नजदीकी लोग उसे डरा-धमका कर दबाना चाहते हैं। अपनी मनमर्जी से काम करवाना चाहते हैं। सार्वजनिक तऱैर पर मंत्री द्वारा गांव में उसके बारे में अपमानित करने वाले शब्द बोले गए हैं।
उसने आरोप लगाया कि मंत्री के खास व्यक्ति से एक वोट से चुनाव जीतने के कारण मंत्री उससे रंजिश रखे हुए हैं और अनुसूचित जाति का होने के कारण उसे दबाने का प्रयास किया जा रहा है। सरपंच ने आरोप लगाया कि मंत्री व उसके नुमाइंदों से उसे व उसके परिवार को जान का खतरा बना हुआ है।
यह था मामला
गौरतलब है कि 2 जनवरी को पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली ने गांव नाढोड़ी में आयोजित कार्यक्रम में सरपंच के न पहुंचने पर तैश में आकर राइट टू रिकॉल के जरिये सरपंच बदलने की चेतावनी दे दी थी। बाद में सरपंच के समर्थन में कई सरपंचों ने मंत्री के खिलाफ रोष भी जताया। जिले के कुछ सरपंचों द्वारा ई-टेंडरिंग के विरोध और इस मामले को लेकर प्रदेशभर के सरपंचों को 15 जनवरी को टोहाना में एकत्रित करने की मुहिम चल रही है।