फतेहाबाद। शिक्षित युवा विकसित समाज का निर्माण करते हैं। विकसित समाज से ही विकसित देश बनता है। शहर में आज भी ऐसे सैकड़ों माता-पिता है, जो अपने बच्चों को स्कूल भेजने में असमर्थ है। कारण ये है कि इन बच्चों का परिवार कभी शिक्षा से जुड़ा ही नहीं। ऐसे में न तो बच्चे शिक्षा का महत्व समझ पा रहे और न ही उनके माता-पिता।
जो बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे है, ऐसे बच्चों को पढ़ाने के लिए उन्हें शिक्षा से जोड़ने के लिए संगीता प्रणामी जांगडा अभियान चला समाजसेवा कर रही हैं। वे खुद बीए व जेबीटी हैं। पिछले पांच साल में वे अनेक बच्चों को शिक्षा से जोड़ चुकी हैं। पहले शहर के सेक्टर 10 में रह रहे झुग्गियों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ा और उनका नाम स्कूल में दर्ज करवाया। इसके बाद अब सेक्टर 8 में रह रहे चरवाहों के बच्चे को पढ़ाते हुए शिक्षा का महत्व समझा रहीं हैं।
ये दोनों सेक्टर अभी विकसित नहीं हुए, ऐसे में यहां बड़ी संख्या में झुग्गी में लोग रहते हैं। अब उनके पास पांच से 12 साल तक के बच्चे जिन्होंने अभी तक शिक्षा के बारे में पता नहीं था।
वे उनके चंद महीनों के प्रयास से शब्द बोलना सीख गए। खुद झुग्गियों में रहने वाले उनके स्वजन आश्चर्यचकित की उनके परिवार में पहली बार कोई पढ़ना सीख गया।
वैसे संगीता खुद एक साधारण परिवार से संबंध रखती हैं। वे अपने परिवार व बच्चों के साथ समय निकालकर पहले विश्वास दिव्यांग स्कूल में बच्चों को पढ़ाती हैं। संवाद
जरूरतमंद परिवार की लड़कियों की शादी में कर रहीं सहयोग
- संगीता प्रणामी नई उम्मीद वेल्फेयर ट्रस्ट संस्था से जुड़ी हुई हैं। इस संस्था के साथ मिलकर ही संगीता प्रणामी सामाजिक कार्य कर रही हैं। पिछले काफी समय से संगीता प्रणामी संस्था से जुड़कर करीब एक दर्जन से अधिक जरूरतमंद परिवार की लड़की की शादी के लिए सहयोग कर चुकी हैं। पहले वे सिर्फ बच्चों को पढ़ाती थी, बाद में उन्होंने शादी में सहयोग की जरूरत को समझा और संस्था के साथ मिलकर इस कार्य की शुरुआत की।
सरकारी के बजाय निजी स्कूल में करवा रहीं बच्चों की पढ़ाई
- शहर के हिसार रोड व बीघड़ रोड पर झुग्गी झोपडि़यों में रहने वाले बच्चों को शिक्षा की शुरुआत करवाने के बाद इन बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए संस्था की ओर से निजी स्कूल में दाखिला करवाया जाता है ताकि वे पढ़ लिख सके। इस बार भी नए सिरे से शुरू होने वाले सत्र में भी बच्चों के स्कूल में दाखिले करवाएं जाएंगे।