फतेहाबाद। मेडिकल कॉलेज अग्रोहा में एक माह बाद फिर से हेपेटाइटिस-सी और बी के सैंपल की जांच शुरू हो चुकी है। हालांकि अक्तूबर में सैंपल दे चुके 40 मरीजों को झटका लगा है। लैब में सैंपल को तय तापमान में रखना होता है, लेकिन जांच किट खत्म होने पर करीब डेढ़ माह तक जांच बंद थी। नतीजतन ये सैंपल लैब में पड़े रहे। जांच शुरू हुई तो सैंपल खराब मिले।
अब अग्रोहा मेडिकल कॉलेज ने एक बार फिर से जिला नागरिक अस्पताल से मरीजों के सैंपल मांगे हैं। इसलिए मंगलवार को 40 मरीजों को बुलाकर सैंपल लेकर दोबारा भेजे गए हैं। इनमें 20 उन मरीजों को भी शामिल किया गया जिनके सैंपल एक बार खराब हो गए। सप्ताह में मंगलवार को ही अस्पताल से 20 मरीजों के सैंपल भेजे जाते हैं। अस्पताल प्रशासन ने अग्रोहा से 20 सैंपल और भेजने की अनुमति मांगी थी। अगले सप्ताह भी 40 सैंपल भेजे जाएंगे।
तीन से छह माह तक खानी होती हैं दवाइयां
डॉक्टरों के मुताबिक हेपेटाइटिस-सी के मरीजों को तीन माह तक दवा खानी होती है। जिन मरीजों का लिवर खराब हो जाता है, उन मरीजों को छह महीने तक दवाई दी जाती है।
जिले में हेपेटाइटिस के मरीजों का विवरण
जिला अस्पताल में शुरू हुआ उपचार
वर्ष 2017
जिले में मिल चुके हेपेटाइटिस-सी के संक्रमित मरीज
5,950
मिल चुके हेपेटाइटिस-बी के संक्रमित मरीज
92
नोट : ये आंकड़ा जून तक का है।
अनुबंध खत्म होने के बाद बढ़ रहा दर्द
स्वास्थ्य विभाग ने हेपेटाइटिस-सी और बी की जांच के लिए निजी लैब से अनुबंध किया था लेकिन वर्ष 2022 में इस अनुबंध को खत्म कर दिया गया। आरटीपीसीआर लैब में जांच के आदेश दिए गए। जिले में पहले माइक्रोबायोलॉजिस्ट न होने से प्रक्रिया रुकी रही। यहां नियुक्ति हुई तो छह माह बाद पद खाली हो गया। पहले पीजीआई रोहतक में सैंपल भेजे गए लेकिन वहां कार्यभार ज्यादा होने से रोक लगने पर सैंपल अंबाला और सिरसा भेजे गए लेकिन वहां भी दिक्कत होने के कारण अब सैंपल अग्रोहा भेजे जा रहे हैं।
लैब में जांच के लिए अक्तूबर में दो सप्ताह हेपेटाइटिस-सी के 40 सैंपल भेजे गए थे लेकिन वहां पर जांच किट न होने के कारण बाद में सैंपल रोक लिए गए लेकिन जब किट आने पर जांच शुरू हुई तो वह सैंपल खराब मिले। सैंपल खराब होने के कई कारण हो सकते हैं। अब संबंधित मरीजों को दोबारा बुलाकर सैंपल भेजे जा रहे हैं। लैब में भेजे जाने वाले सैंपल की संख्या भी बढ़ा दी गई है।
- डॉ. मनीष टुटेजा, विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल, फतेहाबाद।