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ज्यादा बारिश से 25 हजार एकड़ में फसल नष्ट

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पिछले दिनों हुई मानसून की बारिश से जिले की 25 हजार एकड़ भूमि पर खड़ी फसलें नष्ट हो गई। इनमें 15 हजार एकड़ भूमि में नरमा व 10 हजार एकड़ में धान की फसल बारिश के पानी से डूब गई। इनमें सर्वाधिक नुकसान टोहाना व रतिया खंड में हैं। कृषि विभाग के पास अब तक धान व नरमा के खराबे के मुआवजे के लिए 72 किसानों के आवेदन आ चुके हैं। कृषि विभाग के डीडीए ने किसानों से कहा कि वह अपने बैंक से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा करवाकर खराबे का आवेदन विभाग को दे सकते हैं। बता दें कि धान की फसल में पानी खड़ा होने पर खराब हुई फसल के नुकसान की भरपाई इस योजना में नहीं है।
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जानकारी अनुसार 12 से 22 जुलाई तक फतेहाबाद में भारी बारिश हुई। इसमें जिले की औसत 83 एमएम बारिश दर्ज की गई लेकिन रतिया व टोहाना में करीब 150 एमएम बारिश हुई। ऐसे में वहां नरमा व धान की फसल पानी में डूब गई। गांव अक्कांवाली, समैण, नन्हेड़ी, कन्हड़ी, जापतेवाला, लाम्बा, कुदनी, भीमेवाला व जाखल सहित अनेक निचले क्षेत्रों की धान व नरमे की फसल में तीन दिन तक पानी खड़ा रहा जिन्हें बाद में किसानों ने पंप लगाकर खेतों से निकाला। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यहां पर नरमे की फसल 60 फीसदी व धान की 50 फीसदी फसल को नुकसान पहुंचा है। कृषि विभाग का कहना है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बजाज एलियांज कंपनी के साथ बीमा का करार हो चुका है जिसका 15 जुलाई को नोटिफिकेशन आ गया था। जिन किसानों ने बीमा नहीं करवाना उन्होंने 24 जुलाई तक संबंधित बैंक को लिखकर दे दिया है। बाकी ऋणी व गैर ऋणी किसान 31 जुलाई तक अपना बीमा कटवाकर बैंक को प्रीमियम भर सकते हैं जिसके बाद कृषि विभाग को खराबे का आवेदन भी दे सकते हैं। मालूम हो कि जिन किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड बनवा रखा है। उन किसानों का बैंक ने 24 जुलाई 31 जुलाई तक प्रीमियम काट लेना है।
कृषि विभाग के उपनिदेश डॉ. राजेश सिहाग ने कहा है कि बारिश के जलभराव से धान व नरमे की फसल खराब होने पर रतिया व टोहाना खंड के 60 आवेदन विभाग के पास आ चुके हैं। इनकी जांच पड़ताल करके कम्पनी को लिखा जायेगा। ताकि किसानों को मुआवजा मिल सके। उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने अभी तक प्रीमियम नहीं कटवाया वह बैंक में जाकर बीमा का प्रीमियम कटवाकर उसके बाद कृषि विभाग के खंड कार्यालय में आवेदन दे सकता है।
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सिहाग ने कहा कि किसानों को दिक्कत न हो इसके लिए विभाग ने प्रत्येक खंड में खराबे के आवेदन लेने का काम शुरू कर दिया है। ताकि किसानों को खराब फसल का मुआवजा मिल सके। बता दें कि धान की फसल में जलभराव होने की स्थिति में खराब हुई फसल का बीमा योजना में मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं हैं। नरमे की बिजाई हुए एक माह से ऊपर हो चुका है, जबकि धान की फसल की बिजाई हाल में हुई है। किसानों का नरमे पर तीन हजार रुपये प्रति एकड़ व धान पर 2 हजार रुपये प्रति एकड़ राशि खर्च हो चुकी है। अब दोबारा फसल बिजाई पर पुन: खर्च उठाना पड़ेगा।
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इतनी हुई
जुलाई माह एमएम
05 10 एमएम
12 12 एमएम
20 15 एमएम
21 46 एमएम
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