जाट आंदोलन की आगजनी के खिलाफ 35 बिरादरियों के गुस्से के सामने रविवार को एकबारगी तो जिला प्रशासन के पांव तले जमीन खिसक गई। गुस्साई भीड़ ने फतेहाबाद के डीसी एनके सोलंकी तथा एसडीएम संतलाल पचार के साथ भी धक्कामुक्की की।
दरअसल, रविवार को जाट आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के पीड़ितों के समर्थन में रविवार को फतेहाबाद की 35 बिरादरियों के नुमांइदों ने दोषियों को सजा देने एंव आगजनी के शिकार हुए लोगों को तुरंत मुआवजा दिए जाने की मांग के लिए पपीहा पार्क में बैठक बुलाई थी।
बैठक में पहुंचे लोगों के चेहरे पर सरकार के खिलाफ गुस्सा साफ तौर पर झलक रहा था। बैठक समाप्त होने के बाद निर्णय लिया गया कि प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इस बात की भनक लगते ही एसएचओ दिनेश ने 35 बिरादरी के लोगों को मार्च निकालने से रोका और एसडीएम को मौके पर बुलाने की पेशकश की। लोगों ने इसे नकार दिया और सरकार और पुलिस विरोधी नारे करते हुए नेशनल हाईवे से लघु सचिवालय तक रोष मार्च निकाला।
हालांकि, बस स्टैंड के पास एसडीएम संतलाल पचार मौके पर ज्ञापन लेने के लिए पहुंच गए और उन्होंने मांग पत्र लेने की पेशकश की। लेकिन रोष मार्च कर रहे लोगों ने उन्हें ज्ञापन देने से इंकार करते हुए रोष मार्च जारी रखा। इस दौरान कुछ लोगों ने एसडीएम से धक्का मुक्की भी की।
लोगों के पहुंचने से पहले ही प्रशासन ने लघु सचिवालय के दोनों गेट बंद कर दिए। इससे रोष मार्च करके पहुंचे लोग और अधिक भड़क गए। आक्रोशित लोगों ने एसडीएम संतलाल पचार का घेराव कर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। कुछ युवकों ने गेट फांदकर अंदर घुसने की कोशिश की, जिसे पुलिस ने रोक लिया। लोगों ने इसके लिए एसडीएम को दोषी मानकर ज्ञापन देने से इंकार कर दिया और सिर्फ डीसी को ज्ञापन देने की बात पर अड़ गए।
लघु सचिवालय के मुख्य गेट के एक तरफ पुलिस फोर्स तथा दूसरी तरफ आक्रोशित भीड़ के बीच 20 मिनट तक तनाव की स्थिति बनी रही। लोगों के गुस्से को भांपते हुए एसडीएम ने तुरंत उपायुक्त को सारे मामले की जानकारी दी। सूचना मिलते ही डीसी एनके सोलंकी पैदल ही मौके पर पहुंचे, लेकिन लोगों का गुस्सा और बढ़ चुका था। डीसी के आते ही भीड़ ने एक बार फिर से प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
इस दौरान कई लोग गेट फांदकर अंदर घुस आए और इन लोगों ने डीसी सोलंकी के साथ भी धक्कामुक्की की। सुरक्षा कर्मियों ने डीसी को भीड़ से निकालकर उनके कार्यालय पहुंचाया। इस दौरान भीड़ भी लघु सचिवालय का गेट खुलवाकर डीसी के पीछे सचिवालय के प्रांगण तक पहुंच गई। भारी पुलिस फोर्स ने आक्रोशित भीड़ को वहीं पर रोककर उनके प्रतिनिधि मंडल को डीसी से मिलाने की बात कही। नारेबाजी के बीच 35 बिरादरी के 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के लोगों ने उपायुक्त को उनके कार्यालय में जाकर ज्ञापन सौंपा।
35 बिरादरी के लोगों ने प्रशासन के सामने रखीं ये मांगें
आरक्षण के नाम पर हुए दंगों से प्रभावित दुकानदारों के परिवार के एक सदस्य को पुलिस इंस्पेक्टर की नौकरी दी जाए।
तोड़फोड़ और आगजनी के नुकसान की भरपाई का आकलन एक सप्ताह में पूरा कर नुकसान का पूरा भुगतान हो। पीड़ित दुकानदारों पर स्टॉक या बिल आदि की शर्त न रखी जाए।
सभी बैंकों को निर्देश दिए जाएं कि दंगा पीड़ित व्यापारियों को 3 फीसदी दर पर आसान किस्तों पर 20 लाख का ऋण दिया जाए।
दंगा पीड़ितों की शिनाख्त कर उनकी गिरफ्तारी हो और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक दंगा पीड़ितों से नुकसान की कीमत वसूल कर पीड़ितों को दी जाए।
दंगा प्रभावित सभी व्यापारियों से सरकार आगामी दो वर्षों तक किसी प्रकार का कोई टैक्स वसूल न किया जाए।
दंगा करवाने में शामिल और दंगा रोकने में विफल रहे अधिकारी व कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज कर प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।
पुलिस व सेना की फायरिंग में मारे गए उपद्रवियों की कोई मुआवजा न दें क्यों कि सरकार इस कदम से 35 बिरादरी में और अधिक रोष पनपेगा।
तोड़फोड़ व आगजनी के नुकसान की भरपाई के लिए सरकार जो कमेटी बनाए उसमें स्थानीय व्यापारियों को भी शामिल करें।
उम्रदराज लोगों व अनाथ बच्चों का विशेष ध्यान रखा जाए।
प्रभावित दुकानदारों, मकान मालिकों व प्रतिष्ठान के नुकसान का क्लेम बीमा कंपनियां 15 दिन में तुरंत करें।
मदद के लिए आगे आए फतेहाबादवासी
51 हजार रुपये पंजाबी सभा
51 हजार रुपये जवाहर चौक व्यापार यूनियन
51हजार रुपये- अरोड़वंश महासभा
1 लाख 1 हजार रुपये दरियापुर 35 बिरादरी
31 हजार रुपये लक्ष्मीनारायण धर्मशाला
31 हजार रुपये स्वर्णकार समाज
21 हजार रुपये हनुमान मंदिर सभा लाजपत नगर
21 हजार रुपये सब्जी मंडी यूनियन
21 हजार रुपये कैंटर यूनियन
21 हजार रुपये गुरुद्वारा सिंह सभा
11 हजार रुपये सोनू कुक्कड़
इस मौके पर सम्मेलन के संयोजक नरेश टीटू, यशपाल सिंघल के अलावा दीपक भिरडाना, शैलेन भास्कर, पुरुषोत्तम दास बंसल, दीपक मेहता अलीका, महेश मेहता, सुनील बंसल, डॉ. आत्म प्रकाश मेहता, गुलशन हंस, विक्रमदत्त शर्मा, राजेंद्र चौधरी, विजय निर्मोही, महेंद्र सिंह वधवा, हरीश शर्मा मौजूद रहे।
नहीं पहुंचा कोई राजनेता
पपीहा पार्क में बुलाई गई 35 बिरादरी की बैठक में सबसे बड़ी हैरानी की बात यह रही कि इसमें किसी भी पार्टी का राजनेता नहीं पहुंचा। यहां तक कि भाजपा की तरफ से पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने भी दूरी बनाए रखी। हालांकि, इससे पहले हुई बैठक में जरूरी हलका विधायक व भाजपा के पदाधिकारी शामिल हुए थे।
जाति विशेष का बहिष्कार करने का एलान
35 बिरादरी की बैठक में हरजिंद्र सिंह जिंदी ने कहा कि अगर 84 के दंगों के आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाता तो आज ऐसे हालात न होते। बैठक में एलान किया गया कि उपद्रव करने वाली जाति विशेष को वोट नहीं दिए जाएंगे और सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।