भूना। ढाणी भोजराज के चर्चित मामले में उप पुलिस अधीक्षक संजय बिश्नोई के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में सोमवार को सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार ने अदालत को बताया कि भ्रष्टाचार निवारण कानून 1988 की धारा 17-ए के तहत उप पुलिस अधीक्षक के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति दे दी गई है।
अब पुलिस कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगी। मामला डीएसपी के रीडर दर्शन कुमार बनाम हरियाणा राज्य का है। न्यायाधीश सुमित गोयल की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई। अदालत के 17 अगस्त के आदेश के बाद अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह सुधीर राजपाल और राज्य सतर्कता ब्यूरो के पुलिस अधीक्षक अर्श वर्मा वीडियो बैठक के माध्यम से अदालत में पेश हुए।
सुनवाई के दौरान पुलिस अधीक्षक ने अदालत को बताया कि पिछली सुनवाई में गलती से कहा गया था कि अभियोजन की मंजूरी देने के सक्षम अधिकारी अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह हैं जबकि वास्तव में इसके सक्षम अधिकारी मुख्य सचिव हैं। इस स्पष्टीकरण के बाद उच्च न्यायालय ने अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह को व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी।
अदालत ने पुलिस अधीक्षक को भी व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी है। साथ ही पहले से जारी अंतरिम आदेश को आगे भी जारी रखा है। मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को होगी। मामले को जरूरी सूची में रखा जाएगा।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हितेश वर्मा और सरकार की ओर से वरिष्ठ उप महाधिवक्ता महिमा यशपाल सिंगला अदालत में पेश हुईं। हालांकि पहले मामले की जांच सिरसा एंटी करप्शन ब्यूरो के इंस्पेक्टर सत्यवान कर रहे थे। मगर अब सरकार की मंजूरी मिलने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो हांसी डीएसपी को जांच सौंप दी गई है।