भूना। जिलेभर का कचरा भूना में लाकर कचरा प्रबंधन प्लांट लगाने की प्रस्तावित योजना एक बार फिर विवादों में घिर गई है। नगर पालिका चेयरपर्सन, पार्षदों और शहरवासियों ने इस योजना का पहले ही खुलकर विरोध किया था। 3 अक्टूबर 2025 को हुई नगर पालिका हाउस की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर स्पष्ट कर दिया गया था कि भूना में किसी भी सूरत में जिलेभर का कचरा प्लांट नहीं लगाया जाएगा और इसके लिए नगर पालिका कोई भूमि उपलब्ध नहीं कराएगी।
हाउस की बैठक में यह भी सहमति बनी थी कि यह प्रोजेक्ट न केवल पर्यावरण के लिए नुकसानदेह होगा, बल्कि शहरवासियों के स्वास्थ्य और जीवन गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल असर डालेगा। इसी कड़ी में नगर पालिका चेयरपर्सन अर्पणा पंकज पसरीजा ने शहरी निकाय मंत्री विपुल गोयल के समक्ष भी इस योजना का विरोध दर्ज कराया था। उन्होंने मंत्री को ज्ञापन सौंपकर भूना में जिलेभर का कचरा लाने वाले प्लांट को निरस्त करने की मांग की थी।
हालांकि अब एक बार फिर आधिकारिक स्तर पर कचरा प्लांट लगाने की सुगबुगाहट तेज होने लगी है। जैसे ही यह चर्चा शहर में फैली, लोगों में नाराजगी बढ़ गई। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि भूना पहले से ही सीमित संसाधनों और बुनियादी सुविधाओं की चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में पूरे जिले का कचरा यहां लाना शहर को कचरे का ढेर बनाने जैसा होगा।
शहरवासियों का तर्क है कि कचरा प्रबंधन के नाम पर भूना को प्रयोगशाला नहीं बनने दिया जाएगा। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब हाउस की बैठक में प्रस्ताव पास हो चुका है और जनप्रतिनिधि भी विरोध जता चुके हैं, तो फिर इस निर्णय को थोपने की कोशिश क्यों की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, अब शहर के लोग आंदोलन का रास्ता अपनाने की रणनीति बनाने में जुट गए हैं। सामाजिक संगठनों, व्यापार मंडलों और वार्ड स्तर पर बैठकें कर आगे की रूपरेखा तैयार की जा रही है। लोगों का साफ कहना है कि यदि जिले का कचरा भूना में लाने का फैसला वापस नहीं लिया गया, तो सड़कों पर उतरकर शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक आंदोलन किया जाएगा।