कहते हैं प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती। पंजाब विकलांग क्रिकेट टीम के खिलाड़ी सुखविंद्र सुक्खी को देख यह सच साबित होता है। सुखविंद्र सुक्खी एक पैर से विकलांग हैं।
बिना लाठी के सहारे, वह खड़े तक नहीं हो सकता। लेकिन पंजाब विकलांग क्रिकेट टीम के लिए ओपनिंग करते हैं। क्रिकेट पिच पर खेलते समय सुक्खी के एक हाथ में लाठी तो दूसरे हाथ में क्रिकेट बैट होता है। अब जरा कल्पना कीजिए, उनको क्रिकेट खेलने की। विकलांगता को धता बताते हुए ये पंजाबी मुंडा गेंदबाजों के लिए खौफ बना हुआ है।
महज एक हाथ से बैटिंग करने वाले सुक्खी को आउट करना टेढ़ी खीर है। इस बात को वीरवार को हरियाणा के गेंदबाजों ने भी माना है।
विकट परिस्थिति में भी चेहरे पर मुस्कान
सुखविंद्र सुक्खी बचपन से विकलांग हैं। लेकिन बावजूद इसके उन्होंने परिस्थितियों से समझौता नहीं किया बल्कि परिस्थितियों को अपने अनुकूल बना लिया। सुक्खी बताते हैं कि जब पहली बार क्रिकेट खेलने की इच्छा जताई तो लोगों ने मजाक उड़ाया, लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
लगातार कई महीनों के प्रयास के बाद एक हाथ से क्रिकेट खेलने की प्रैक्टिस की तो जाकर मैदान पर उतरा। शुरुआत में नर्वस थे लेकिन परिजनों ने उनके हौसले को गिरने नहीं दिया। इसके बाद सुक्खी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। पहले जिला स्तर पर ट्रायल में सफल हुआ तो बीते दिनों पंजाब की टीम में जगह मिली।
भारतीय टीम में चयन का सपना हैं आंखों में
पंजाब के लिए सुखविंद्र सुक्खी लगातार बेहतर प्रदर्शन करते रहे हैं। वीरवार को भी विश्व विकलांग दिवस के उपलक्ष्य में फतेहाबाद में हरियाणा के खिलाफ उनका प्रदर्शन शानदार रहा।
एक हाथ में क्रिकेट बैट और दूसरे हाथ में लाठी संभाल कर उन्होंने हरियाणा के सभी बॉलर्स का पसीना निकाल दिया। सुक्खी का विकेट लेने में हरियाणा के खिलाड़ियों को खासी मशक्कत करनी पड़ी। सुखविन्द्र सुक्खी अब भारतीय विकलांग टीम में जगह चाहते हैं। उन्हें भरोसा है कि उनकी मेहनत रंग लाएगी।
भारतीय विकलांग क्रिकेट टीम में शामिल होना मेरा सबसे बड़ा सपना है। वाहे गुरु ने चाहा तो जल्द ही ये सपना पूरा करूंगा। -सुखविन्द्र सुक्खी, सदस्य, विकलांग क्रिकेट टीम, पंजाब