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निर्विरोध चुने चौधरी, अब ग्रांट का वादा भूली सरकार

Sun, 29 May 2016 11:42 PM IST
फतेहादबाद ब्यूरो/ अमर उजाला
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टक्कर इतनी जोरदार थी कि मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर समीर दत्ता सड़क से करीब 25 फुट नीचे जा गिरे। - फोटो : file
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गांवों में बढ़ते क्राइम को रोकने के लिए पुलिस ने नई पहल की है। आईजी रेंज की तरफ से फतेहाबाद जिले के 10 गांवों का चयन किया गया है, जहां पुलिस अधिकारियों को उतारा जाएगा। अधिकारी इन गांवों में जाकर क्राइम को कंट्रोल करेंगे। गोद लिए गांव में अधिकारियों का फोकस क्राइम की ओर बढ़ रहे युवाओं पर होगा। आईजी रेंज की तरफ से एक एएसपी, दो डीएसपी और तीन एसएचओ को 10 गांव गोद दिए गए हैं, जहां उन्हें तीन महीने में क्राइम खत्म करना होगा।
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ये गांव होंगे अधिकारियों के जिम्मे
गांव                             गोद लेने वाले पुलिस अधिकारी
1.नहला                                        गंगाराम पूनिया सहायक पुलिस अधीक्षक
2.बैजलपुर                                    भूना थाना प्रभारी बिमला
3.भूना
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4.समैण                                       आर.एस.तोमर   डीएसपी टोहाना
5.जाखल                                     टोहाना थाना प्रभारी टोहाना
6.कंहडी
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7.बीघड़                                       विजय सिंह डीएसपी शहर फतेहाबाद
8.अहरवां                                       बिजेंद्र सिंह सदर थाना प्रभारी
9.गोरखपुर                                      ललित अग्रोहा थाना प्रभारी
10.चूहड़पुर                                    ओमप्रकाश थाना प्रभारी जाखल

यह करना होगा पुलिस अधिकारियों को गोद लिए गांव में
-तीन महीनों में आबंटित गांव को दहशतगर्द, शोहदे, नशेबाज, खुंदकी और बात-बात पर असलाह की नोक पर जोर जबरदस्ती करने वाले आपराधिक प्रवृत्ति के लड़कों के प्रभाव से मुक्त करना।
-कानून और अमन पसंद लोगों को एकजुट करेंगे। अपराध को व्यवसाय समझने वाले और मुफ्त की चौधर रखने वाले लड़कों को सलाखों के पीछे डालेंगे।

ये जानकारियों जुटानी होंगी
जायज असलाह धारी
निर्वाचित प्रतिनिधि
सम्मानित गैर-राजनैतिक व्यक्ति

गांवों को गोद देने की इसलिए पड़ी जरूरत
आईजी ओपी सिंह द्वारा जारी किए गए आदेश में साफ तौर पर कहा गया है कि कई गांवों का ताना-बाना इस तरह का हो गया है कि एजेंडा बदमाश और मुंहजोर किस्म के लोग तय करने लगे हैं। बुजुर्ग, मेहनतकश और नियम-कायदा पसंद युवा हाशिये पर चले गए हैं। लड़के भारी तादाद में नाजायज असलाह की तरफ आकर्षित होने लगे हैं। वे इसे बदले का औजार, गुंडागर्दी का लाइसेंस और कमाई का जरिया समझते हैं।
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पुलिस अधिकारियों द्वारा गांवों को गोद लेने के पीछे उद्देश्य यही है कि वहां पुलिस की प्रभावी और निश्चित मौजूदगी हो। कानून और अमन पसंद लोगों का वर्चस्व हो और गुंडे किस्म के लड़कों के नेटवर्क को ध्वस्त कर उन्हें निशस्त्र किया जाए।
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ओपी नरवाल, एसपी, फतेहाबाद
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