फतेहाबाद। स्वास्थ्य विभाग के नए नियमों से एक बार सरकारी अस्पतालों में दवाइयों को लेकर मारामारी मचने वाली है। दवाइयों की कमी से मरीजों का दर्द भी बढ़ सकता है। वेयर हाउस से दवाई नहीं मिलने पर अस्पताल अब अपने स्तर पर परचेज नहीं कर पाएंगे। सिविल सर्जन कार्यालय ही दवाइयों की खरीदारी करेगा। इसके लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा। जिले के सरकारी अस्पतालों ने 45 दिन के लिए 640 प्रकार की अलग-अलग दवाइयों की डिमांड सिविल सर्जन कार्यालय को दी है। अब सिविल सर्जन कार्यालय स्वास्थ्य महानिदेशक कार्यालय से अनुमति लेगा। अनुमति मिलने के बाद सिविल सर्जन कार्यालय संबंधित दवाइयों की खरीद शुरू करेगा।
सरकारी अस्पतालों के फार्मेसी ऑफिसर की माने तो एंटी बायटिक, दर्द निवारक, एंटी एलर्जी, खांसी, आई ड्रॉप्स आदि दवाइयों की डिमांड की गई है। वेयर हाउस से इन दवाइयों की सप्लाई न के बराबर हो रही है। वहीं, एंटी रेबीज के वेयर हाउस से अस्पतालों में इंजेक्शन ही नहीं आ रहे है। जिला नागरिक अस्पताल में दो माह बाद 200 इंजेक्शन आए थे, जो कि खत्म हो चुके हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर इंजेक्शन ही नहीं है। विभाग ने चार हजार इंजेक्शन की डिमांड की है। जिला नागरिक अस्पताल ने ही 1500 इंजेक्शन मांगे हैं।
पहले अस्पताल खुद करते थे लोकल परचेज :
जिला नागरिक अस्पताल में सबसे ज्यादा दवाइयों की डिमांड है। वेयर हाउस से दवाइयों की सप्लाई न आने पर अस्पताल एनओसी लेकर खुद परचेज कर लेते थे, लेकिन इस पर अब रोक लग गई है। सिविल सर्जन कार्यालय को ही डिमांड भेजनी होगी।
जिले की ये है स्थिति
जिला अस्पताल - 1
उप जिला अस्पताल - 1
सीएचसी - 5
पीएचसी - 18
सब सेंटर - 131
अर्बन पीएचसी - 4
जिले में फार्मेसी ऑफिसर के पद - 47
जिले में फार्मेसी ऑफिसर कार्यरत - 20
अस्पतालों में दवाइयों की काफी कमी है। सिविल सर्जन को 640 प्रकार की दवाइयों की डिमांड भेजी है। जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी करके दवाइयों की कमी अस्पतालों में पूरी की जाए। इसके अलावा सरकार फार्मेसी ऑफिसर के पदों को भी भरें।
- कृष्ण बिश्नोई, प्रधान, जिला फार्मेसी ऑफिसर एसोसिएशन