फतेहाबाद। जमीन की खरीद-फरोख्त में धोखाधड़ी के मामले में अदालत ने पुलिस जांच पर सवाल उठाते हुए कड़ा रुख अपनाया है। एसीजेएम डॉ. मधुर बजाज की अदालत ने आर्थिक अपराध शाखा के प्रभारी निरीक्षक संदीप कुमार सहित अन्य संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच और कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
शिकायतकर्ता एडवोकेट कपिल बांगा की शिकायत पर अल्फा कॉर्प कंपनी के सीईओ संतोष अग्रवाल और जीएम कमल नागपाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। आरोप है कि वर्ष 2015 में प्लॉट का पूरा भुगतान करने के बावजूद न तो कब्जा दिया गया और न ही रजिस्ट्री की गई। कोर्ट में खुलासा हुआ कि जांच रिपोर्ट आरोपियों ने खुद तैयार कर टाइप की थी। इस पर बाद में पुलिस ने मुहर लगा दी।
अदालत ने इसे पुलिस और आरोपियों की मिलीभगत का प्रमाण माना। कोर्ट ने यह भी पाया कि पुलिस ने पहले आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट तैयार की लेकिन बाद में बिना ठोस आधार के अचानक कैंसिलेशन रिपोर्ट पेश कर दी। अदालत ने पुलिस के इस यू-टर्न को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ऐसे मामलों को केवल दीवानी बताकर बंद नहीं किया जा सकता।
अदालत ने दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी के तहत संज्ञान लेते हुए 21 मई के लिए समन जारी किए हैं। साथ ही कैंसिलेशन रिपोर्ट खारिज कर पुलिस को 30 दिन के भीतर गहन जांच कर फाइनल रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने पुलिस महानिरीक्षक (हिसार रेंज) को भी निर्देश दिए हैं कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश की जाए।