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फतेहाबाद: सरपंचों का पंचायत मंत्री को खुला चैलेंज, 10 फीसदी सरपंच ही साथ कर लें, मान जाएंगे सच्चा आदमी

Mon, 20 Feb 2023 11:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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फतेहाबाद में जीटी रोड पर प्रदर्शन करते हुए सरपंच व उनके साथ आए ग्रामीण।
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फतेहाबाद। ई-टेंडरिंग व राइट टू रिकॉल के खिलाफ सोमवार को जिलाभर के सरपंचों और ग्रामीणों ने फतेहाबाद शहर में रोष मार्च निकाला व सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान सरपंच एसोसिएशन ने पंचायत मंत्री को खुला चैलेंज देते हुए कहा है कि अगर वह प्रदेश के 10 फीसदी सरपंच भी अपने साथ कर लेते हैं, तो हम मान जाएंगे कि पंचायत मंत्री सच्चे आदमी हैं। इस दौरान सरपंच एसोसिएशन ने एसडीएम राजेश कुमार को सीएम मनोहर लाल के नाम ज्ञापन भी सौंपा।
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फतेहाबाद की अनाज मंडी के शेड के नीचे सोमवार को जिले के अनेक सरपंच व ग्रामीण एकत्रित हुए। प्रदर्शन में ग्रामीण महिलाओं ने भी भाग लिया। सभी लोगों ने जीटी रोड पर रोष प्रदर्शन व नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय के मुख्य गेट पर पड़ाव डाल दिया। इस दौरान सरकार के खिलाफ सरपंचों व ग्रामीणों ने नारेबाजी की।
पंचायत मंत्री द्वारा प्रदेश के केवल 10 फीसदी सरपंचों के ही ई-टेंडरिंग का विरोध करने की बात पर पलटवार करते हुए हरियाणा सरपंच एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष रणबीर गिल ने कहा कि सरपंचों में पंचायत मंत्री के खिलाफ इतना रोष है कि देवेंद्र बबली किसी भी हलके से चुनाव लड़ लें, पूरे हरियाणा के सरपंचों ने कसम खा रखी है कि उनको कहीं से भी जीतने नहीं देंगे।
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दो साल से पंचायतों में पास नहीं हुए प्रस्ताव
उन्होंने कहा कि आज मनरेगा में लोगों को काम नहीं मिल रहा है, दो साल तक पंचायतें न होने से कोई प्रस्ताव पास नहीं हुआ। जो ग्रांट आई, वह चहेते गांवों में लगा दी गई। सरपंच गांव के विकास के लिए चुने जाते हैं और गांव की जनता उनको चुनती है, लेकिन ई-टेंडरिंग व राइट टू रिकॉल जैसे कानून लाकर सरपंचों के हाथ बांधने की कोशिश हो रही है। यह लड़ाई केवल सरपंचों की नहीं, बल्कि प्रदेश के हर गांव के किसान व मजदूर की है। बीजेपी व जजपा का हर गांव में विरोध होगा। पंचायत मंत्री ने सरेआम सरपंचों को चोर कहा था, आज तक किसी भी नेता ने सरपंचों के बारे में ऐसी गलत बात नहीं की है। हम पंचायत मंत्री से किसी भी कीमत पर बात नहीं करेंगे, अगर सरकार आगे आती है तो बातचीत हो सकती है। सरकार देहात को समाप्त करने का प्रयास कर रही है, जिसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरपंच को पता होता है कि कहां काम करवाना है और कितना करवाना है, लेकिन ई-टेंडरिंग के नाम पर सरपंचों के साथ अन्याय किया गया है।

दो दिन बाद करेंगे बैठक
हरियाणा सरपंच एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष रणबीर गिल ने बताया कि दो दिन बाद सरपंचों की बैठक होनी है, जिसमें आगे के आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। 1 मार्च को सीएम आवास का भी घेराव किया जाएगा। अगर हम पर वाटर कैनन या व लाठीचार्ज हुआ तो हम लाठियां खाने को भी तैयार हैं, लेकिन हमारा मुद्दा सही है। हम ई-टेंडरिंग के खिलाफ लगातार लड़ते रहेंगे। सरकार नहीं मानी तो सरपंच अपना इस्तीफा देने से भी नहीं हिचकिचाएंगे।

ये हैं सरपंचों की मांगें
प्रदेश के सरपंचों की मांग है कि ई-टेंडरिंग प्रणाली को पूरी तरह से बंद किया जाए, राइट टू रिकॉल सबसे पहले एमपी व एमएलए पर लागू हो, संविधान के 73वें संशोधन की 11वीं सूची के 29 अधिकार पूर्ण रूप से हरियाणा के सरपंचों को दिए जाएं, मनरेगा की ऑनलाइन हाजिरी बंद की जाए, क्योंकि बहुत से गांवों में मोबाइल नेटवर्क नहीं है। मनरेगा की दैनिक दिहाड़ी 600 रुपये की जाए, सरपंचों का मानदेय 30 हजार और पंचों का पांच हजार रुपये किया जाए, परिवार पहचान पत्र को पूर्णतया बंद किया जाए।
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