टोहाना। दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि पंचायत मंत्री की शब्दावली ठीक नहीं है। सरपंच भी चुने हुए प्रतिनिधि हैं। उनको कटघरे में खड़ा करना ठीक नहीं है। अगर कोई सरपंच गलत रास्ते पर चलेगा, तो उसकी जवाबदेही जनता तय करती है। वह अगले चुनाव में ऐसे सरपंचों नहीं जीतने देगी। पंचायत मंत्री को एक ही नजर से सभी सरपंचों को नहीं देखना चाहिए। प्रदेश में बहुत से सरपंच पूरी ईमानदारी से काम करते हैं।
दीपेंद्र सोमवार को टोहाना में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इससे पहले हाथ से हाथ जोड़ो अभियान को लेकर उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि वह 100 प्रतिशत सरपंचों को ईमानदारी का सर्टिफिकेट नहीं दे रहे हैं, लेकिन सबको गलत ठहराना भी ठीक नहीं है। हमारी सरकार में सरपंचों को 20 लाख रुपये तक के विकास कार्य करवाने की शक्तियां दी गई थी। जिसे अब भाजपा-जजपा सरकार ने दो लाख रुपये कर दिया है। पंचायती राज संस्थाओं के अधिकारों में वृद्धि होनी चाहिए थी। मगर गठबंधन सरकार ने इसे कम करके शक्तियों को घटाने का काम किया है।
कांग्रेस सरपंचों के आंदोलन के पक्ष में
दीपेंद्र ने कहा कि कांग्रेस पार्टी सरपंचों के आंदोलन के पक्ष में हैं। उनकी मांगों को जल्द पूरा किया जाना चाहिए। राइट टू रिकॉल सरपंचों पर ही क्यों, विधायक और सांसदों पर भी लागू करना चाहिए। बहुत से विधायक ऐसे हैं, जिनके क्षेत्र में राइट टू रिकॉल करवाएं, तो सरकार को स्थिति पता चल जाएगी।
20 साल से टोहाना आ रहा हूं, अब जितनी सड़कों की बदहाली नहीं देखी
दीपेंद्र ने कहा कि वह पिछले 20 साल से टोहाना आ रहे हैं, लेकिन सड़कों का हाल अब जितना बुरा है, उतना कभी नहीं हुआ। उकलाना से टोहाना तक तो सड़क सबसे ज्यादा बुरी हालत में है। इस सरकार ने प्रदेश को विकास की पटरी से उतार दिया है। जजपा के प्रदेशाध्यक्ष और पंचायत मंत्री के हलके का यह हाल है तो बाकी प्रदेश की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस मौके पर पूर्व मंत्री परमवीर सिंह, पूर्व विधायक प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा, पूर्व विधायक जरनैल सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष रणधीर सिंह सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।