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मात्र एक चिकित्सक पर 40 गांवों के बीमार लोगों के इलाज का दारोमदार

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पीएचसी भूना का भवन - फोटो : Fatehabad
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भूना। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भूना में चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल रहा है। इससे उन्हें निजी अस्पतालों की शरण में जाना पड़ रहा है। भूना के 40 गांवों के तीन लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य सेवा हेतु पीएचसी का बड़ा भवन व तीस बेड तो उपलब्ध हैं लेकिन एसएमओ सहित 15 मेडिकल ऑफिसर के पद खाली पड़े हैं। पीएचसी में मात्र एक चिकित्सक के सहारे कार्य चल रहा है। वह भी मात्र लड़ाई झगड़ों की एमएलआर काटने तक ही सीमित है। अगर कोई सड़क दुर्घटना हो जाए तो घायल लोगों का उपचार चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी करते हैं।
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महिला चिकित्सक एवं बाल रोग विशेषज्ञ तक नहीं
वर्तमान में सर्दी के कारण बच्चों एवं महिला रोगियों की संख्या बढ़ रही है। मगर भूना पीएचसी में महिला व बाल रोग विशेषज्ञ के पद खाली है। जिसके कारण मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। किंतु आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मरीज अपना इलाज भी नहीं करवा पाते है। उपरोक्त दोनों चिकित्सकों के खाली होने के कारण गर्भवती महिलाओं की डिलिवरी स्टाफ नर्सों पर निर्भर हैं। परंतु जिस गर्भवती महिला को खून की कमी या बच्चा कमजोर हो तो उसे पहले ही रेफर कर दिया जाता है। इसलिए लोगों के स्वास्थ्य सुविधाओं के सरकारी दावे पीएचसी भूना में खोखले साबित हो रहे हैं।
धूल फांक रही है लाखों की एक्सरे मशीन
पीएचसी भूना में करीब 7 साल पहले लाखों रुपये की लागत से एक्सरे मशीन उपलब्ध करवाई गई थी। किंतु कुछ महीनों के बाद ही मशीन तकनीशियन का तबादला हो गया। लेकिन तभी से लेकर आज तक एक्स-रे करवाने के लिए लोगों को फतेहाबाद या अग्रोहा जाना पड़ रहा है। उपरोक्त मशीन का उपयोग न होने के कारण उसे जंग लग गई है और मौके पर खराब पड़ी है। वही नेत्र रोग विशेषज्ञ का भी पद खाली होने के कारण लोगों को मेडिकल या आंखों के चेकअप के लिए फतेहाबाद का सफर तय करना पड़ता है।
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एसएमओ सहित 15 डॉक्टरों की जिम्मेदारी निभा रहा हूं : डॉक्टर रुस्तम
स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक डॉक्टर रुस्तम ने बताया कि पीएचसी में एसएमओ सहित 15 मेडिकल ऑफिसर के पद रिक्त हैं। जो कार्य 15 डॉक्टरों को करना चाहिए उसे अकेला निभा रहा हूं। लड़ाई झगड़े के मामले में भी एमएलआर काटनी पड़ रही है और मरीजों के स्वास्थ्य की देखभाल भी साथ-साथ करनी पड़ती है। केंद्र में रिक्त पदों को लेकर कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है।
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वर्जन
स्टाफ की दिक्कत के बारे में उच्चाधिकारियों को लिखा जा चुका है, उम्मीद है कि जल्द ही इस बारे में कोई समाधान होगा।
- मनीष बंसल, सिविल सर्जन, फतेहाबाद।
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